चंदौली जिले के बरहनी ब्लॉक के अमड़ा गांव में अमेरिका, केन्या और कंबोडिया के वैज्ञानिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI) वाराणसी के वैज्ञानिकों के साथ किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का भ्रमण किया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने एफपीओ की कार्यप्रणाली, उपलब्धियों और किसानों को प्रदान की जा रही सेवाओं की गहन जानकारी ली।

वैज्ञानिक दल का काला चावल एफपीओ भ्रमण
विदेशी वैज्ञानिकों के इस दल ने विशेष रूप से काला चावल एफपीओ की गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि यह संगठन किस प्रकार स्थानीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में सहायता कर रहा है। संगठन के अधिशासी निदेशक शशिकांत राय एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीकांत सिंह सहित कई प्रमुख सदस्य इस अवसर पर उपस्थित रहे।
प्रमुख चर्चा के बिंदु
भ्रमण के दौरान सीधी बुआई विधि (डीएसआर) को केंद्र में रखकर एक विचार-विमर्श एवं प्रश्नोत्तरी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया:
- एफपीओ द्वारा स्थापित फार्म मशीनरी बैंक और उपलब्ध कृषि यंत्रों का प्रकार व उनकी उपयोगिता।
- शेयरधारकों की संख्या, वार्षिक टर्नओवर और व्यावसायिक गतिविधियाँ।
- एफपीओ की सेवाओं से लाभान्वित होने वाले ग्रामों एवं किसानों की संख्या।
- पूर्व एवं वर्तमान में डीएसआर तकनीक के अंतर्गत किए गए क्षेत्रफल।
- महिलाओं की भागीदारी और डीएसआर के विस्तार के लिए अपेक्षित सहयोग।
एफपीओ की सराहना और आगे की राह
वैज्ञानिकों ने एफपीओ की वर्तमान रैंकिंग, विभिन्न सरकारी संस्थानों से प्राप्त सहयोग और किसानों के बीच आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रसार में संगठन की भूमिका के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने एफपीओ द्वारा किसानों को तकनीकी एवं यांत्रिक सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की। इस कार्यक्रम में अमेरिका, केन्या और कंबोडिया से आए तीन वैज्ञानिकों के साथ 10 भारतीय वैज्ञानिकों ने भाग लिया, जिससे यह भ्रमण अंतर्राष्ट्रीय महत्व का बन गया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
काला चावल एफपीओ क्या है?
काला चावल एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) एक ऐसा समूह है जो काले चावल की खेती करने वाले किसानों को एक साथ लाता है। यह संगठन किसानों को बेहतर बाजार पहुँच, तकनीकी सहायता और खेती से संबंधित सेवाओं में मदद करता है, जिससे उनकी आय बढ़ती है।
सीधी बुआई विधि (DSR) के क्या लाभ हैं?
सीधी बुआई विधि (DSR) चावल की खेती की एक तकनीक है जिसमें धान के पौधों को सीधे खेत में बोया जाता है, बजाय इसके कि उन्हें नर्सरी में तैयार करके रोपा जाए। इसके लाभों में पानी की बचत, श्रम लागत में कमी और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार शामिल हैं।