भारत में कैंसर दवाओं की कीमतें बढ़ने को मंजूरी
भारत सरकार ने प्लैटिनम आधारित कैंसर दवाओं की कीमतें बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय कच्चे माल की बढ़ती लागत और इन महत्वपूर्ण दवाओं की कमी के कारण लिया गया है। देश में फेफड़ों, अंडाशय और पित्तशय के कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन जैसी दवाओं की भारी कमी देखी जा रही थी।

कीमतें क्यों बढ़ाई जा रही हैं?
दवा निर्माता कच्चे माल की ऊंची लागत के कारण इन दवाओं का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक रहे थे। इस वजह से अस्पतालों, खासकर सरकारी सुविधाओं में इन दवाओं की कमी हो गई थी। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने सार्वजनिक हित में इन कीमतों में संशोधन का अनुरोध किया था, जिसे औषधि विभाग ने 7 जून को मंजूरी दे दी।
प्रभावित दवाएं और निर्माता:
- सिस्प्लाटिन (Cisplatin)
- कार्बोप्लाटिन (Carboplatin)
- निर्माता: सिप्ला, इंटास फार्मास्यूटिकल्स, नाप्रोड लाइफ साइंसेज, वीनस रेमेडीज आदि।
अन्य दवाओं पर भी असर:
प्लेटिनम आधारित कैंसर दवाओं के अलावा, भारत में सक्रिय औषधि सामग्री की लागत में वृद्धि के कारण दो एंटीटेटनस इम्युनोग्लोबुलिन इंजेक्शन की कीमतों में वृद्धि को भी मंजूरी दी गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: भारत में किन कैंसर दवाओं की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं?
A1: मुख्य रूप से प्लैटिनम आधारित कैंसर दवाएं जैसे सिस्प्लाटिन और कार्बोप्लाटिन की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।
Q2: कैंसर दवाओं की कीमतें बढ़ाने का मुख्य कारण क्या है?
A2: कच्चे माल की लागत में वृद्धि और इन दवाओं की कमी इसका मुख्य कारण है।
Q3: क्या यह निर्णय सरकार ने लिया है?
A3: औषधि विभाग ने एनपीपीए के अनुरोध को मंजूरी दी है, और अंतिम निर्णय एनपीपीए द्वारा लिया जाएगा।