भारतीय ड्रोन उद्योग: देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत

एक साल पहले, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी जासूसी ड्रोन भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे थे। लेकिन आज भारत का भारतीय ड्रोन उद्योग न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान के शाहेद ड्रोन ने यह साबित कर दिया है कि ड्रोन आधुनिक युद्ध में कितने महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय ड्रोन उद्योग का उदय

ऑपरेशन सिंदूर के समय भारत में बड़े पैमाने पर ड्रोन बनाने की क्षमता सीमित थी, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। सरकार, सेना और निजी क्षेत्र के साझा प्रयासों से भारत ने ड्रोन निर्माण में अभूतपूर्व प्रगति की है। आज देश में करीब 600 से अधिक कंपनियां प्रतिदिन 2000 से ज्यादा हमलावर ड्रोन बनाने की क्षमता रखती हैं।

यह क्षमता केवल सेनाओं की जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार पर भी अपनी नजर जमाए हुए हैं। जल्द ही ड्रोन निर्यात के सौदे अंतिम रूप ले सकते हैं। भारतीय कंपनियां क्रिटिकल ड्रोन टेक्नोलॉजी में पारंगत हो चुकी हैं, और इनके ड्रोन को जीपीएस डिनायल और जैमिंग प्रूफ बनाया गया है।

देश के कई राज्य ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग के गढ़ के रूप में उभर रहे हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और तमिलनाडु प्रमुख हैं।

मांग और सरकारी प्रोत्साहन

ड्रोन इंडस्ट्री का विकास और मांग

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट स्मिथ शाह के अनुसार, भारतीय ड्रोन उद्योग का विकास सीधे तौर पर उसकी मांग से जुड़ा है। पहले सेनाओं और सरकार की ओर से बड़े ऑर्डर नहीं आते थे, जिससे कंपनियों के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन क्षमता विकसित करना मुश्किल था। हालांकि, अब स्थिति बदल गई है और भारतीय कंपनियां प्रतिदिन 2000 ड्रोन बनाने में सक्षम हैं।

सरकारी खरीद से कंपनियों को लाभ

नोएडा स्थित आइजी डिफेंस के को-फाउंडर बोधिसत्व सांगप्रिय बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के समय उनकी कंपनी महीने में 200 हमलावर ड्रोन बनाती थी, जो आज प्रतिदिन 200 हो गई है। उन्होंने भारतीय सेनाओं को करीब 5,000 हमलावर ड्रोन की आपूर्ति की है।

सरकार की नीतियां भी ड्रोन इंडस्ट्री के लिए काफी सहायक सिद्ध हो रही हैं। यूपी डिफेंस कॉरिडोर में कंपनियों को जमीन मिल रही है और सरकार करीब 20,000 करोड़ रुपये के ड्रोन खरीदने जा रही है। इस बड़े ऑर्डर से घरेलू ड्रोन कंपनियों को अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का तेजी से विस्तार करने का मौका मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • Q: भारतीय ड्रोन उद्योग कितना विकसित हो चुका है?
  • A: भारत में अब करीब 600 कंपनियां प्रतिदिन 2000 से अधिक हमलावर ड्रोन बनाने की क्षमता रखती हैं, और यह वैश्विक बाजार पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  • Q: सरकार भारतीय ड्रोन कंपनियों को कैसे मदद कर रही है?
  • A: सरकार यूपी डिफेंस कॉरिडोर जैसी पहल के माध्यम से जमीन उपलब्ध करा रही है और लगभग 20,000 करोड़ रुपये के बड़े ड्रोन खरीद ऑर्डर देकर घरेलू कंपनियों को प्रोत्साहित कर रही है।
  • Q: भारतीय ड्रोन किन क्षमताओं से लैस हैं?
  • A: भारतीय ड्रोन क्रिटिकल टेक्नोलॉजी में पारंगत हैं, और इन्हें इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से बचाव के लिए जीपीएस डिनायल और जैमिंग प्रूफ बनाया गया है।

भारतीय ड्रोन उद्योग देश को आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह न केवल रक्षा क्षमताओं को बढ़ा रहा है बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में भी योगदान दे रहा है। ड्रोन टेक्नोलॉजी के इस बढ़ते क्षेत्र में भारत का भविष्य उज्ज्वल है।

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