घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव: प्रमुख कारण
घरेलू अर्थव्यवस्था इस समय कुछ महत्वपूर्ण बाहरी और आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रही है। पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारत की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है। मुख्य रूप से खाद, कच्चे तेल और सोने की बढ़ती कीमतें सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

खाद सब्सिडी का बढ़ता बोझ
सरकार पर सबसे अधिक वित्तीय दबाव खाद की बढ़ती कीमतों को लेकर है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक, रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से खाद सब्सिडी में 100 प्रतिशत बढ़ोतरी की गुजारिश की है। बजट में खाद सब्सिडी के मद में 1.77 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब इतनी ही अतिरिक्त राशि की मांग की गई है। यदि सरकार उर्वरक मंत्रालय की मांग मान लेती है तो खाद सब्सिडी 3.5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगी। सरकार खाद की बढ़ती कीमतों का भार किसानों पर नहीं डालती है, इसलिए इस सब्सिडी से सरकार बच भी नहीं सकती है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
इसके अलावा, 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने लगी थीं। हालांकि, पहले 78 दिनों तक उपभोक्ताओं पर बढ़ती कीमत का भार नहीं डालने के एवज में सरकार ने तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) से 1.23 लाख करोड़ रुपये के उत्पाद शुल्क नहीं लिए। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि अब सरकार उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से बचने के लिए ओएमसी को और राहत देने की स्थिति में नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण फिलहाल ओएमसी को रोजाना 500-600 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
सोने के आयात से चुनौती
खाद और कच्चे तेल के साथ सोने के आयात से भी वित्तीय दबाव बढ़ा है। सोने के आयात को हतोत्साहित करने के लिए सरकार ने आयात शुल्क में बढ़ोतरी की है। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि भारत में सोने को लेकर लोगों में विशेष लगाव है, इसलिए एक सीमा तक ही सरकार आयात को रोकने का उपाय कर सकती है। यह भी घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव का एक महत्वपूर्ण कारक है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: भारतीय अर्थव्यवस्था पर वर्तमान में मुख्य रूप से किन चीजों का दबाव है?
A1: भारतीय अर्थव्यवस्था पर मुख्य रूप से खाद की बढ़ती कीमतें, कच्चे तेल के दाम और सोने के आयात का दबाव है, जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
Q2: खाद सब्सिडी में कितनी बढ़ोतरी का अनुरोध किया गया है?
A2: रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से खाद सब्सिडी में 100% बढ़ोतरी का अनुरोध किया है, जिससे कुल सब्सिडी 3.5 लाख करोड़ रुपये के पार जा सकती है।
Q3: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ रहा है?
A3: शुरुआती राहत के बाद अब सरकार तेल मार्केटिंग कंपनियों को और राहत देने की स्थिति में नहीं है, जिससे उपभोक्ताओं पर पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का भार पड़ सकता है।
Q4: सरकार सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठा रही है?
A4: सरकार ने सोने के आयात को हतोत्साहित करने के लिए आयात शुल्क में बढ़ोतरी की है, लेकिन लोगों के विशेष लगाव के कारण इसे पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण है।