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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से बढ़ा उ…

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का बढ़ा उत्साह

भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) में भारतीय शेयर बाजारों को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। इसका सीधा असर उनके निवेश पैटर्न पर पड़ा है, और वे लगातार दूसरे सप्ताह भारतीय बाजारों में शुद्ध निवेशक बने हुए हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक

एफपीआई निवेश का मौजूदा परिदृश्य

नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के पहले पखवाड़े (13 फरवरी तक) में एफपीआई का भारतीय शेयरों में कुल निवेश 19,675 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस ताजा निवेश के साथ, कैलेंडर वर्ष 2026 में एफपीआई की कुल निकासी घटकर 16,287 करोड़ रुपये रह गई है, जो पहले की भारी निकासी के मुकाबले एक सुधार दर्शाता है।

यह निवेश एफपीआई द्वारा लगातार तीन महीने की शुद्ध निकासी के बाद आया है:

कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान एफपीआई ने भारतीय शेयरों से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये (या 18.9 अरब डॉलर) की शुद्ध निकासी की थी। फरवरी के पहले सप्ताह (1 से 6 फरवरी) में एफपीआई ने 8,129 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया था, जो मौजूदा रुझान की शुरुआत थी।

निवेश बढ़ने के प्रमुख कारण

वैश्विक आर्थिक चिंताएं कम

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रमुख शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव के अनुसार, हालिया खरीदारी वैश्विक स्तर पर व्यापक आर्थिक चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका में मुद्रास्फीति से जुड़े आंकड़ों में नरमी के कारण समर्थित है। इसने ब्याज दर चक्र के प्रति सकारात्मक भावना पैदा की है, जिससे बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर को स्थिर करने में मदद मिली। नतीजतन, भारत सहित उभरते बाजारों के प्रति जोखिम भावना में सुधार हुआ है।

घरेलू स्तर पर स्थिर आर्थिक संकेतक

घरेलू मोर्चे पर, भारत के स्थिर आर्थिक संकेतक, नियंत्रित मुद्रास्फीति और आमतौर पर उम्मीद के मुताबिक कॉर्पोरेट आय ने देश के विकास दृष्टिकोण में विश्वास को मजबूत किया है। 13 फरवरी तक कुल 11 कारोबारी सत्रों में से 9 में एफपीआई शुद्ध खरीदार रहे, जबकि केवल दो अवसरों पर शुद्ध बिकवाल बने।

डेट बाजारों में भी जारी है निवेश

शेयरों के साथ-साथ, एफपीआई का भारत के डेट या बॉन्ड बाजारों में भी निवेश जारी है। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट्स में महत्वपूर्ण निवेश किया है:

सभी निवेश इंस्ट्रूमेंट्स को मिलाकर, 13 फरवरी तक एफपीआई कुल 29,707 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं, जो भारतीय बाजारों में उनके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

FAQ

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) कौन होते हैं?

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) ऐसे निवेशक होते हैं जो अपने देश के बाहर के वित्तीय बाजारों में निवेश करते हैं, जैसे कि शेयर, बॉन्ड, या अन्य प्रतिभूतियां। ये निवेशक अक्सर अल्पकालिक लाभ के लिए निवेश करते हैं और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अपना निवेश जल्दी से बदल सकते हैं।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का FPI निवेश पर क्या असर पड़ा?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते ने निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ाया है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं। इस समझौते से वैश्विक आर्थिक स्थिरता की धारणा मजबूत हुई है, जिससे भारतीय बाजारों को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बना दिया गया है।

हाल ही में एफपीआई ने किन क्षेत्रों में निवेश किया है?

हाल ही में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों के साथ-साथ डेट (बॉन्ड) बाजारों में भी निवेश किया है। इसमें सामान्य सीमा वाले डेट, वोलेंटरी रिटेंशन रूट वाले डेट और फुली एक्सेसिबल एक्सेस रूट वाले डेट जैसे विभिन्न इंस्ट्रूमेंट्स शामिल हैं।

हाल की बाजार गिरावट और कंपनियों पर असर

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि हाल ही में शेयर बाजारों में गिरावट भी देखी गई। बीते सप्ताह शेयर बाजारों में रही गिरावट के कारण बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी दर्ज की गई। इस दौरान दिग्गज आईटी कंपनियों टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और इन्फोसिस के पूंजीकरण में सबसे ज्यादा गिरावट रही। सप्ताह के दौरान बीएसई सेंसेक्स 953.64 अंक गिरा था। इसके अलावा एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एलआईसी और भारती एयरटेल का पूंजीकरण भी घटा है।

अधिक जानकारी के लिए, आप नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) की वेबसाइट देख सकते हैं।

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