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वाराणसी प्रयागराज जलमार्ग: गंगा में जहाजों के लिए गहरा चैनल

वाराणसी प्रयागराज जलमार्ग

वाराणसी प्रयागराज जलमार्ग: गंगा में गहरा चैनल खोजने की कवायद

गंगा नदी में वाराणसी से प्रयागराज के बीच राष्ट्रीय जलमार्ग-एक पर मालवाहक और यात्री जहाजों के सुरक्षित और सुगम संचालन के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य इस खंड पर गहरा चैनल खोजना है। मल्टी-मोडल टर्मिनल (एमएमटी) रामनगर से लेकर प्रयागराज तक के हिस्से में थलवेग सर्वे शुरू हो गया है।

वाराणसी प्रयागराज जलमार्ग

थलवेग सर्वे क्या है?

थलवेग सर्वे एक विशेष जल संरक्षण प्रक्रिया है जिसके तहत नदी की धारा में सबसे गहरे बिंदु की पहचान की जाती है। गंगा की धारा समय-समय पर अपना रास्ता और गहराई बदलती रहती है। यह सर्वे सुनिश्चित करता है कि जहाजों को चलने के लिए पर्याप्त गहराई कहाँ उपलब्ध है। यह एक पाक्षिक प्रक्रिया है, जिससे नदी के तल में होने वाले बदलावों का सटीक डेटा हर 15 दिन में मिलता रहता है।

सर्वेक्षण की आवश्यकता और महत्व

वाराणसी-प्रयागराज रूट पर जहाजों का परिचालन अभी तक काफी मुश्किल भरा रहा है। इस महत्वपूर्ण खंड पर सर्वेक्षण कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। जलमार्ग विकास परियोजना के तहत इस मार्ग को बड़े जहाजों के परिचालन के योग्य बनाया जा रहा है।

जलमार्ग विकास परियोजना के लाभ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: वाराणसी प्रयागराज जलमार्ग पर थलवेग सर्वे क्यों किया जा रहा है?

A1: वाराणसी प्रयागराज जलमार्ग पर जहाजों के सुरक्षित और सुगम संचालन के लिए गंगा नदी में गहरे चैनल की पहचान करने हेतु थलवेग सर्वे किया जा रहा है, क्योंकि नदी की गहराई अक्सर बदलती रहती है।

Q2: थलवेग सर्वे का डेटा कितनी बार अपडेट किया जाता है?

A2: थलवेग सर्वे एक पाक्षिक प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है कि नदी के तल में होने वाले बदलावों का सटीक डेटा हर 15 दिन में उपलब्ध कराया जाता है।

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