वध 2 फिल्म समीक्षा: सामाजिक यथार्थ की गहराई
वर्ष 2022 में आई फिल्म ‘वध’ ने आम आदमी के शोषण और ताकतवर वर्ग के अत्याचार को बखूबी दर्शाया था। ‘वध 2’ इसी विचारधारा को आगे बढ़ाती है, लेकिन एक नई कहानी के साथ, जिसमें पहले भाग के पात्रों के नाम जरूर रखे गए हैं। यह फिल्म सामाजिक यथार्थ, नैतिक द्वंद्व और इंसानी सहनशीलता की सीमाओं को टटोलने वाली एक सशक्त प्रस्तुति है।

वध 2 की कहानी: न्याय और नैतिकता का संघर्ष
फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित जेल में सेट है। शुरुआत में युवा मंजू सिंह (मेहर देओल) को दो प्रेमियों की हत्या के आरोप में 28 साल की सजा सुनाई जाती है। कहानी वर्तमान में आती है, जहां मंजू (नीना गुप्ता) उम्रदराज हो चुकी हैं और जल्द रिहाई की उम्मीद कर रही हैं। जेल में पुलिसकर्मी शंभूनाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) के दिल में उनके लिए खास जगह है। इसी बीच, प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा) जेलर बनकर आते हैं, जिनकी सोच जातिगत ऊंच-नीच से प्रभावित है। जेल में नैना (योगिता बिहानी) झूठे आरोपों में फंसकर आती है, जिस पर बाहुबली विधायक के भाई केशव (अक्षय डूंगरा) की बुरी नजर है। प्रकाश केशव की बेरहमी से पिटाई करता है, जिसके बाद केशव जेल से फरार हो जाता है और यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है।
निर्देशन और पटकथा
निर्देशक जसपाल सिंह संधू की तारीफ करनी होगी कि ‘वध 2’ में वह रहस्य और रोमांच को बनाए रखने में कामयाब रहते हैं। दोबारा मामला खुलने पर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, वह आम आदमी की मजबूरी, जातिवादी मानसिकता, नैतिक उलझनों, पुलिस की पड़ताल और मानवीय रिश्तों की कड़ियों को सहज और प्रभावी ढंग से कहानी में पिरो देते हैं। हिंदी सिनेमा में जेल आधारित दृश्यों में अक्सर दिखने वाले घिसे-पिटे फॉर्मूलों से जसपाल ने दूरी बनाए रखी है। फिल्म का क्लाइमेक्स दिलचस्प है, हालांकि मंजू अपने किसी स्वजन की बात क्यों नहीं करती, इसका स्पष्ट विवरण कहानी में नहीं मिलता।
कलाकार और तकनीकी पक्ष
कास्टिंग डायरेक्टर विकी सदाना ने भूमिकाओं के अनुरूप सही कलाकारों का चयन किया है। फिल्म के संवाद कई जगह चुटीले और असरदार बन पड़े हैं, जो कहानी को जीवंतता देते हैं। सिनेमैटोग्राफर सपना नरूला ने जेल के माहौल और परिवेश को बारीकी से कैमरे में उतारा है। अद्वैत नेमलेकर का बैकग्राउंड स्कोर भी भाव और प्रभाव को गहराई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अभिनय
- संजय मिश्रा: शंभू नाथ की भूमिका में संजय मिश्रा बेहद प्रभावशाली हैं। बेटे की बेरुखी का दर्द, अकेलापन और संवेदनशीलता हर भाव को उन्होंने सहजता से जिया है।
- नीना गुप्ता: निर्दोष होकर भी सजा काट रही मंजू की पीड़ा और धैर्य को नीना गुप्ता ने स्वाभाविक ढंग से प्रस्तुत किया है।
- कुमुद मिश्रा: जातिवादी सोच वाले जेलर के रूप में कुमुद मिश्रा सटीक हैं।
- अक्षय डोगरा: क्रूर केशव के रूप में अक्षय डोगरा नफरत बटोरने में कामयाब रहते हैं।
- अमित के सिंह: जांच अधिकारी अतीत की भूमिका में खासा प्रभाव छोड़ते हैं।
- शिल्पा शुक्ला और योगिता बिहानी: सहयोगी भूमिका में अपना पूरा योगदान देती हैं।
निष्कर्ष
‘वध 2’ कुल मिलाकर एक सशक्त फिल्म है, जो सामाजिक यथार्थ, नैतिक द्वंद्व और इंसानी सहनशीलता की सीमाओं को टटोलती है। यह दर्शकों को अंत तक सोचने पर मजबूर करती है और हिंदी सिनेमा में एक नई दिशा का संकेत देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: वध 2 किस बारे में है?
उत्तर: ‘वध 2’ एक जेल ड्रामा है जो सामाजिक यथार्थ, जातिवादी मानसिकता, नैतिक द्वंद्व और मानवीय सहनशीलता की सीमाओं की पड़ताल करती है।
प्रश्न: वध 2 में मुख्य कलाकार कौन-कौन हैं?
उत्तर: फिल्म में संजय मिश्रा, नीना गुप्ता, कुमुद मिश्रा, अक्षय डोगरा, शिल्पा शुक्ला और योगिता बिहानी मुख्य भूमिकाओं में हैं।
प्रश्न: क्या वध 2 पहली वध फिल्म की अगली कड़ी है?
उत्तर: ‘वध 2’ पहली फिल्म की विचारधारा को आगे बढ़ाती है और पात्रों के नाम साझा करती है, लेकिन इसकी कहानी नई और स्वतंत्र है।