इमर्जिंग टेक्नोलॉजी युवाओं को अवसर पर ताज़ा अपडेट: पूरी जानकारी नीचे पढ़ें।
प्रदेश सरकार का मौजूदा बजट सिर्फ खर्च बढ़ाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि तकनीकी शिक्षा से रोजगार में बड़े बदलाव की रूपरेखा है। इसमें एक साफ संकेत है कि अब केवल डिग्री या डिप्लोमा पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि कौशल उद्योग से जुड़ाव और रोजगार क्षमता ही सफलता की असली कसौटी बनेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंडस्ट्री, साइबर, रक्षा निर्माण, एमएसएमई, डिजिटल गवर्नेंस और हेल्थ टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर युवाओं के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोले जा रहे हैं।
इमर्जिंग टेक्नोलॉजी: युवाओं के लिए नए अवसर
‘यूपी बजट में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से युवाओं को अवसर’ विषय पर दैनिक जागरण की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय विमर्श में इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) लखनऊ के निदेशक प्रोफेसर विनीत कंसल ने कहा कि संस्थानों और उद्योगों के बीच जो दूरी है, उसे उभरती तकनीकों के माध्यम से कम किया जा सकता है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी यानी उभरती हुई तकनीकों में निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्र हैं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- ब्लॉकचेन
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- रोबोटिक्स
- साइबर सुरक्षा
- सेमीकंडक्टर
- ड्रोन
- इलेक्ट्रिक वाहन
- ग्रीन हाइड्रोजन
तकनीकी शिक्षा का त्रिस्तरीय इकोसिस्टम
प्रोफेसर कंसल के अनुसार सरकार तकनीकी शिक्षा के लिए त्रिस्तरीय इकोसिस्टम विकसित कर रही है। इस मॉडल में विभिन्न संस्थान अलग-अलग भूमिकाएँ निभाएंगे:
- इंजीनियरिंग कॉलेज: तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के केंद्र होंगे।
- पॉलिटेक्निक संस्थान: मध्यम स्तर के तकनीकी विशेषज्ञ तैयार करेंगे।
- आईटीआई: डिजिटल दक्षता से लैस कुशल टेक्नीशियन तैयार करेंगे।
यह व्यवस्था डिफेंस कॉरिडोर, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, टेक्सटाइल्स, एमएसएमई क्लस्टर और स्मार्ट गवर्नेंस जैसी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
AI मिशन और इंजीनियरिंग संस्थानों पर प्रभाव
प्रदेश में AI मिशन की दिशा में पहल की गई है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे:
- आईटीआई में AI लैब स्थापित होंगी।
- AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे।
- डाटा लैब व डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होगा।
इसका सीधा असर इंजीनियरिंग संस्थानों पर पड़ेगा। अब हर शाख में AI का समावेश जरूरी होगा। इंजीनियरिंग संस्थाओं को AI, डाटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और रोबोटिक्स में माइनर प्रोग्राम शुरू करने होंगे। बजट में ड्रीम लैब (डिजाइन, रोबोटिक, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग और मेकाट्रॉनिक्स) का प्रस्ताव शामिल है। इंजीनियरिंग संस्थान मेंटर की भूमिका निभाते हुए फैकल्टी प्रशिक्षण, लैब साझा करने और संयुक्त प्रमाणन कार्यक्रम चला सकते हैं। इससे नैक और एनबीए मूल्यांकन में सुधार होगा।
