स्मार्ट फार्म तकनीक: खेती में क्रांति
बिहार के समस्तीपुर जिले के नयानगर गांव में सुधांशु कुमार ने स्मार्ट फार्म तकनीक का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया है। उनके खेत में आधुनिक सेंसर आधारित प्रणालियां यह तय करती हैं कि पौधों को कब और कितनी सिंचाई की आवश्यकता है, और कितनी खाद देनी है। यह तकनीक न केवल खेती को आसान बना रही है, बल्कि इसे अधिक फायदेमंद भी बना रही है। सुधांशु के फार्म को देखने दूर-दूर से किसान आते हैं और उनसे आधुनिक खेती के गुर सीखते हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उनके फार्म का दौरा कर चुके हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए पास 62 वर्षीय सुधांशु ने 1990 में केरल में टाटा टी गार्डन में असिस्टेंट मैनेजर की नौकरी छोड़कर खेती शुरू की थी। शुरुआत में उन्होंने 5 एकड़ जमीन पर खेती की, जो अब बढ़कर लगभग 200 एकड़ हो गई है। वह केला, आम, लीची, अमरूद, जामुन और ड्रैगन फ्रूट के साथ-साथ मक्का, गेहूं और मसूर जैसी फसलें भी उगाते हैं। श्रमिकों की कमी और समय पर उपलब्धता न होने के कारण, उन्होंने तकनीक का उपयोग करने का फैसला किया। सबसे पहले उन्होंने 40 हजार रुपये खर्च करके ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर मशीन खरीदी, जिसके अच्छे परिणाम मिलने के बाद उनका तकनीक आधारित खेती का सफर आगे बढ़ता गया।
कंट्रोल रूम से कृषि गतिविधियों की निगरानी
सुधांशु कुमार के खेत में एक एआई (AI) आधारित फार्म लैब का कंट्रोल रूम सिंचाई और अन्य कृषि गतिविधियों की निगरानी के लिए एक केंद्रीय जंक्शन के रूप में कार्य करता है। इस सिस्टम को खेत और उसमें लगे पेड़-पौधों की जरूरतों के अनुसार प्रोग्राम किया गया है।
कंट्रोल रूम में निम्नलिखित प्रणालियाँ लगी हैं:
- सॉइल सेंसर: मिट्टी के स्वास्थ्य और नमी की जानकारी देता है।
- इरिगेशन सेंसर: सिंचाई की वास्तविक आवश्यकता को बताता है।
- सेल्फ-अपलोडिंग वेदर स्टेशन: मौसम की सटीक जानकारी प्रदान करता है।
- ऑटोमेटेड इरिगेशन सिस्टम: स्वचालित रूप से सिंचाई को नियंत्रित करता है।
- फर्टिलाइजर सिस्टम: पौधों को सही मात्रा में खाद पहुंचाता है।
कंट्रोल रूम में लगे ट्रैक ड्रिप सिस्टम के माध्यम से खेत में खाद और कीटनाशक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचते हैं। कंट्रोल रूम से दिए गए इनपुट के आधार पर ही पौधों को पानी और खाद मिलती है। यह प्रणाली पानी की 50 प्रतिशत और खाद की 30 प्रतिशत तक बचत करती है, जिससे लागत में भारी कमी आती है।
अन्य किसानों की सफलता
हसनपुर के किसान विदुर झा और डॉक्टर प्रभात कुमार जैसे कई अन्य किसानों ने भी सुधांशु से प्रेरणा लेकर अपनी खेती में तकनीक का इस्तेमाल किया है और अपनी आय में वृद्धि की है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विज्ञानी डॉ. एस.के. सिंह बताते हैं कि जब किसानों को यह पता हो कि मौसम कैसा रहेगा, पौधे को किस पोषक तत्व की कमी है, और किस खाद की आवश्यकता है, तो स्वाभाविक रूप से फसल अच्छी होगी। यह सब कुछ सुधांशु के फार्म हाउस में उपलब्ध है।
ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जुड़ी निगरानी
सुधांशु का पूरा फार्म ब्रॉडबैंड से जुड़ा हुआ है, जिससे वह दुनिया के किसी भी कोने से अपने स्मार्टफोन या लैपटॉप के जरिए खेत की निगरानी कर सकते हैं। फार्म हाउस में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं, जो सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत करते हैं।
सुधांशु बताते हैं कि तकनीक के प्रयोग से केला और आम की फसल में चार गुना वृद्धि हुई है। पानी और खाद की उतनी ही मात्रा पौधे को मिलती है जितनी उसे वास्तव में चाहिए, और वह भी सीधे जड़ तक पहुंचती है। इससे लागत काफी कम आती है। एक उदाहरण के तौर पर, पहले बाग में लगे केले के पत्ते पीले होकर गिर रहे थे और नए केले में आंतरिक सड़न भी पैदा हो रही थी। अब सेंसर तुरंत बता देता है कि मिट्टी में फंगस लग गया है, जिसके बाद समय पर उपचार किया जाता है और फसल को बचाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
स्मार्ट फार्म तकनीक क्या है?
स्मार्ट फार्म तकनीक एक आधुनिक कृषि प्रणाली है जिसमें सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी जैसी तकनीकों का उपयोग करके कृषि गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण किया जाता है। इसका उद्देश्य पानी, खाद और श्रम जैसे संसाधनों का कुशल उपयोग करके फसल उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार करना है।
स्मार्ट फार्म तकनीक के क्या फायदे हैं?
स्मार्ट फार्म तकनीक के कई फायदे हैं, जिनमें शामिल हैं: पानी और खाद की बचत, श्रम में कमी, फसल की पैदावार में वृद्धि, लागत में कमी, पौधों के स्वास्थ्य की बेहतर निगरानी, और कीटों व बीमारियों का शीघ्र पता लगाना। यह किसानों को दूर से भी अपने खेत की निगरानी करने की सुविधा प्रदान करता है।
किसान सुधांशु कुमार को स्मार्ट फार्मिंग से क्या लाभ हुए?
किसान सुधांशु कुमार को स्मार्ट फार्मिंग से कई महत्वपूर्ण लाभ हुए हैं। उनकी केला और आम की फसल में चार गुना वृद्धि हुई है। वे पानी की 50% और खाद की 30% तक बचत कर रहे हैं, जिससे उनकी लागत काफी कम हो गई है। इसके अतिरिक्त, उन्हें श्रमिकों की कमी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता और वे दुनिया के किसी भी कोने से अपने फार्म की निगरानी कर सकते हैं।