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सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि: 11 साल बाद केंद्र सरकार का फैसला

सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि

सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि: 11 साल बाद बड़ा फैसला

केंद्रीय विधि मंत्रालय ने देशभर के न्यायालयों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों की फीस में लगभग 11 वर्षों बाद महत्वपूर्ण वृद्धि की है। यह फैसला लंबे समय से लंबित था और इससे हजारों सरकारी वकीलों को लाभ मिलेगा। वित्त मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग ने 5 फरवरी को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।

सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि

कितनी बढ़ी वकीलों की फीस?

इस नई व्यवस्था के तहत, वकीलों को मिलने वाली दैनिक फीस में बड़ा बदलाव आया है।

यह फीस वृद्धि वकीलों के काम की प्रकृति और उनके अनुभव को ध्यान में रखते हुए की गई है।

अन्य शुल्कों में भी संशोधन

केवल दैनिक फीस ही नहीं, बल्कि अन्य वर्गों के मामलों और विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के साथ कांफ्रेंस आयोजित करने की फीस में भी संशोधन किया गया है। इसके अतिरिक्त, जो वकील अपने मुख्यालय (जैसे दिल्ली या राज्य की राजधानियों) के बाहर की अदालत में पेश होते हैं, उनकी देर फीस भी बढ़ा दी गई है। सरकारी वकीलों को देय फीस में आखिरी बार अक्टूबर 2015 में संशोधन किया गया था, जिसके बाद यह वृद्धि एक दशक से भी अधिक समय बाद हुई है।

पूर्व विधि सचिव की प्रतिक्रिया

पूर्व केंद्रीय विधि सचिव अंजू राठी राणा ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, “केंद्र के वकीलों की फीस में बढ़ोतरी लागू हो गई है। यह काम विधि सचिव के रूप में मेरे कार्यकाल के दौरान शुरू किया गया था। सभी वकीलों को बधाई। यह दशक से भी अधिक समय से लंबित था। मुझे खुशी है कि यह प्रयास अपने सही नतीजे पर पहुंच गया है।” यह वृद्धि कानूनी बिरादरी के लिए एक सकारात्मक कदम है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि कब से प्रभावी हुई है?
उत्तर: यह वृद्धि वित्त मंत्रालय के कानूनी मामलों के विभाग द्वारा 5 फरवरी को जारी अधिसूचना के बाद प्रभावी हुई है।

प्रश्न 2: फीस वृद्धि से कौन से वकील लाभान्वित होंगे?
उत्तर: देशभर के न्यायालयों में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले ग्रुप-ए, ग्रुप-बी और ग्रुप-सी के सभी वकील इससे लाभान्वित होंगे।

प्रश्न 3: आखिरी बार सरकारी वकीलों की फीस कब बढ़ाई गई थी?
उत्तर: सरकारी वकीलों की फीस में आखिरी बार अक्टूबर 2015 में संशोधन किया गया था, यानी लगभग 11 साल पहले।

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