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लुप्तप्राय वनस्पतियों को दी ‘संजीवनी,’ यह बचाएंगी कैंसर व एड्स से

कैंसर ,एड्स व उच्च रक्तचाप जैसे रोगों के इलाज में कारगर लुप्तप्राय हिमालयी वनस्पति थुनेर व इलम को वैज्ञानिकों ने संजीवनी दी है। उनके डीएनए युक्त नमूने एकत्र कर राष्ट्रीय जीन बैंक में संरक्षित कर लिए हैं। इनसे इनकी नई पौध तैयार की जा सकेगी ।एलोपैथी हो या फिर आयुर्वेद इलाज की दोनों ही पद्धतियों में इन वनस्पतियों का उपयोग होता है। इनके संरक्षित होने से भविष्य में कैंसर जैसे रोगों के उपचार में मांग बढ़ने पर दवाओं की उपलब्धता बनी रहेगी। इतना ही नहीं आमजन को दवाएं अपेक्षाकृत सस्ती भी सुलभ हो सकेंगी।



थुनेर ( टैक्सस वल्चियाना)व इलम (उल्मस वल्चियाना)  को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की लुप्तप्राय सूची में शामिल किया गया है। हिमालय क्षेत्र में पाए जाने वाले थुनर के पेड़ की छाल में टैक्सोल नामक रसायन होता है। यह कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकता है। इसका उपयोग कीमोथेरेपी से जुड़ी दवाओं में भी होता है । एड्स से जुड़े कापोसी सार्रकोमां नामक रोग  के उपचार में भी यह कारगर है। एक किलो छाल से मात्र 10 ग्राम पैक्लिटैक्सेल दवा बनाई जाती है।

थुनेर व इलम दोनों औषधीय वनस्पतियों का उपयोग सीमांत क्षेत्रोंमें लोग इनकी पत्तियों व चल से औषधि चाय बनाते हैं सर्दी जुकाम की आयुर्वेदिक दावों में भी इसकी छाल का रसायन मिलाया जाता है इल्म में एंटी फंगस एंटीबैक्टीरियल एंटीऑक्सीडेंट गुना का भंडार है इसे तैयार लिप घाव भरने हड्डी रोग चले वह जल जाने पर उपयोग होता है। समुद्र की सतह से करी 3000 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्र में उगने वाले इल्म के औषधीय गुना से अनिद्रा उच्च रक्तचाप सूजन वह हड्डी रोग का इलाज किया जाता है भारत चीन तिब्बत की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में इल्म के साथ ही थूनर का उपयोग होता आ रहा है।

ऐसे तैयार होगी नई पौध

कौशिकी या उसकी संवर्धन के माध्यम से थूनर व इल्म के स्वास्थ्य तने एकत्र कर जीन बैंक स्थित प्रयोगशाला में अनुकूल तापमान में रखे हैं टिश्यू कल्चर से ऊतक वह कोशिकाएं पृथक कर नई बहुत तैयार की जा सकेगी।

तीन राज्यों में हुआ शोध

जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा की राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन के तहत केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब की वरिष्ठ विज्ञानी डॉक्टर पंकज भारद्वाज की अगुवाई में शोध किया गया।

4 वर्ष पूर्व उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश व जम्मू कश्मीर में शोध शुरू किया गया था विज्ञानियों ने उक्त क्षेत्र में थूनर व इल्म के पनपना वह छह संभावित क्षेत्र तलाशी सिल्वर स्टेनिंग तकनीक का उपयोग यानी प्रोटीन व न्यूक्लीटेड एसिड का पता लगाकर इन प्रजातियों का संरक्षण का खाता तैयार किया लुफ्तहांसा वनस्पतियों पर यह अपनी तरह का पहला अनुसंधान है

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