भारत सरकार का रक्षा व्यय लगातार बढ़ रहा है, जो वैश्विक और क्षेत्रीय रणनीतिक परिदृश्य की अस्थिरता को दर्शाता है। हाल के आम बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है। इस बड़े आवंटन के साथ, यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि रक्षा व्यय की गुणवत्ता बनी रहे और इसका प्रभावी ढंग से उपयोग हो।
रक्षा बजट 2024-25: मुख्य आवंटन और उद्देश्य
इस वर्ष के रक्षा बजट में 2.19 लाख करोड़ रुपए सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह देश की सुरक्षा आवश्यकताओं और पुराने सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण की अनिवार्यता को दर्शाता है।
- विमान और एयरो-इंजन: 63,733 करोड़ रुपए
- नौसेना: 25,023 करोड़ रुपए
- राजस्व व्यय (पेंशन सहित): 5.54 लाख करोड़ रुपए (पेंशन के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपए)
सरकार घरेलू एयरोस्पेस निर्माण को मजबूत करने और आयात निर्भरता को कम करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। विमान रखरखाव, मरम्मत और कायाकल्प में उपयोग होने वाले कच्चे माल पर शुल्क माफ करने जैसे उपाय इसी दिशा में हैं।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन में वृद्धि
आत्मनिर्भर भारत पहल ने रक्षा खर्च की संरचना को महत्वपूर्ण रूप से बदला है। पिछले कुछ वर्षों में, 70% से अधिक पूंजीगत खरीद स्वदेशी स्रोतों के लिए आरक्षित की गई है।
इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं:
- रक्षा उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है।
- रक्षा निर्यात तेजी से बढ़कर लगभग 23,500 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जिसमें लगभग 90 देशों को निर्यात किया जा रहा है।
यह रणनीति घरेलू विनिर्माण क्षमता को विकसित करने और आयात पर निर्भरता को कम करने में दृढ़ता दर्शाती है।
सामरिक क्षमताओं का आधुनिकीकरण और नई चुनौतियाँ
भारत को अपनी पारंपरिक सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए उन्नत विमानों, पनडुब्बियों, ड्रोन और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं में निवेश करना होगा। साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, अंतरिक्ष और ड्रोन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देना भी महत्वपूर्ण है, हालांकि इन क्षेत्रों के लिए बजटीय आवंटन पारंपरिक प्लेटफार्मों की तुलना में अभी भी कम है। इस अंतर को कम करने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास में निरंतर वृद्धि आवश्यक है। रक्षा व्यय की गुणवत्ता के लिए यह निवेश महत्वपूर्ण है।
रक्षा व्यय की गुणवत्ता सुनिश्चित करना: एक चुनौती
बढ़े हुए आवंटन के बावजूद, जीडीपी के अनुपात में भारत का रक्षा खर्च अभी भी लगभग 2.2% पर है। राजस्व व्यय जैसी प्रतिबद्धताएँ खर्च में लचीलेपन की गुंजाइश को सीमित करती हैं। इसलिए, तात्कालिक परिचालन आवश्यकताओं और दीर्घकालिक रणनीतिक परिवर्तन के बीच संतुलन साधना भारतीय नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है। सही अमल के बिना, क्षमता वृद्धि की गति प्रभावित हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: भारत के रक्षा बजट में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
A1: भारत के रक्षा बजट में वृद्धि का मुख्य कारण उत्तर-पश्चिमी सीमाओं पर तनाव, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और पुराने सैन्य उपकरणों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता है।
Q2: आत्मनिर्भर भारत का रक्षा क्षेत्र पर क्या प्रभाव पड़ा है?
A2: आत्मनिर्भर भारत पहल ने घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दिया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है। इससे रक्षा उत्पादन और निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिससे रक्षा व्यय की गुणवत्ता भी सुधरी है।
Q3: भारत अपने रक्षा व्यय की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित कर सकता है?
A3: भारत को रक्षा व्यय की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए आवंटित धन को प्रभावी ढंग से खर्च करना चाहिए। इसमें पूंजीगत व्यय (आधुनिकीकरण और नई तकनीकों पर) की हिस्सेदारी बढ़ाना, रक्षा अनुसंधान और विकास में निवेश करना, और परिचालन आवश्यकताओं व दीर्घकालिक रणनीतिक लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाना शामिल है।