भारत लंबी दूरी की एयर डिफेंस सिस्टम के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के ‘प्रोजेक्ट कुशा’ के तहत भारत ऐसी नई पीढ़ी की इंटरसेप्टर मिसाइल विकसित कर रहा है, जो रूस के शक्तिशाली S-400 सिस्टम की बराबरी करेगी या उससे भी बेहतर साबित होगी। यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट कुशा मिसाइल भारत के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच मुहैया कराएगा, ठीक वैसे ही जैसे शाही नाम का जानवर अपने कांटों के सहारे अपनी रक्षा करता है।
प्रोजेक्ट कुशा मिसाइल: भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच
आर्मामेंट रिसर्च और डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) के प्रमुख अंकांथी राजू ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी साझा की है। भारत का लक्ष्य अपनी स्वदेशी क्षमताओं को दुनिया के उन्नत सिस्टम के बराबर लाना और अंततः उनसे आगे निकलना है। यह न केवल देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की स्थिति को भी बेहतर बनाएगा।
तीन स्तर का अभेद्य सुरक्षा कवच: M1, M2 और M3
प्रोजेक्ट कुशा के तहत तीन विशेष इंटरसेप्टर मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जिन्हें M1, M2 और M3 नाम दिया गया है। यह तीनों मिलकर एक ‘लेयर्ड एयर डिफेंस शील्ड’ बनाएंगे। इस सिस्टम का मुख्य उद्देश्य लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और दुश्मन के अन्य महत्वपूर्ण हवाई हमलों सहित हवाई खतरों की एक विस्तृत श्रृंखला को बेअसर करना है।
- M1 इंटरसेप्टर: 150 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ यह मिसाइल दुनिया भर में तैनात कई मध्यम दूरी की वायु रक्षा मिसाइलों पर भारी पड़ेगी। इसकी क्षमता 9M96E2 जैसे सिस्टम से अधिक है।
- M2 इंटरसेप्टर: 250 किलोमीटर की रेंज वाला यह वेरिएंट लंबी दूरी की श्रेणी में आता है और S-400 की 48N6DM और 48N6E3 मिसाइलों के समकक्ष है। यह प्रोजेक्ट कुशा का मुख्य आधार है।
- M3 इंटरसेप्टर: प्रोजेक्ट कुशा की सबसे उन्नत मिसाइल है जिसकी आधिकारिक रेंज 350 किलोमीटर बताई गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें सुधार किए जा रहे हैं ताकि इसकी रेंज 400 किलोमीटर तक बढ़ाई जा सके।
M1 इंटरसेप्टर: 150 किलोमीटर की मारक क्षमता
इस शील्ड की पहली मिसाइल M1 इंटरसेप्टर को 150 किलोमीटर की रेंज के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है। यह दुनिया भर में तैनात कई मध्यम दूरी की वायु रक्षा मिसाइलों पर भारी पड़ेगी। इसकी क्षमता 9M96E2 (जिसकी रेंज 120 किलोमीटर है) जैसे सिस्टम से अधिक है, जो इसे लंबी दूरी पर खतरों को सटीकता और तेजी से नष्ट करने में सक्षम बनाती है। यह भारत की प्रोजेक्ट कुशा मिसाइल कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण घटक है।
M2 इंटरसेप्टर: सिस्टम की रीढ़
दूसरे वेरिएंट M2 की रेंज 250 किलोमीटर होगी। यह लंबी दूरी की श्रेणी में आती है और इसे S-400 की 48N6DM और 48N6E3 मिसाइलों के समकक्ष खड़ा करती है। M2 को प्रोजेक्ट कुशा की लंबी दूरी की वायु रक्षा का कोर (मुख्य आधार) माना जा रहा है, जो तेज गति और ऊंचाई वाले लक्ष्यों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करेगा। यह प्रोजेक्ट कुशा मिसाइल सिस्टम को एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
M3 इंटरसेप्टर: सबसे घातक हथियार
प्रोजेक्ट कुशा के तहत सबसे उन्नत मिसाइल M3 है। इसकी आधिकारिक रेंज 350 किलोमीटर बताई गई है, जो S-400 की 40N6E मिसाइल (400 किलोमीटर) से थोड़ी कम है। हालांकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसमें लगातार सुधार किए जा रहे हैं, जिससे इसकी रेंज 400 किलोमीटर तक बढ़ सकती है। यह दुश्मन के हवाई क्षेत्र में घुसकर लक्ष्य को मार गिराने में सक्षम होगी। यह मिसाइल भारत की सामरिक वायु रक्षा क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
2028 तक पहला ट्रायल
इस विस्तारित रेंज के साथ M3 भारत की रणनीतिक वायु रक्षा को काफी मजबूती देगा। उम्मीद है कि इस इंटरसेप्टर का पहला ट्रायल 2028 तक किया जाएगा। इससे डीआरडीओ को प्रोपल्शन, गाइडेंस और रडार इंटीग्रेशन को बेहतर बनाने का पर्याप्त समय मिलेगा, ताकि प्रशिक्षण के समय तक यह प्रोजेक्ट कुशा मिसाइल अपनी पूरी 400 किलोमीटर की क्षमता हासिल कर सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न: प्रोजेक्ट कुशा क्या है?
उत्तर: प्रोजेक्ट कुशा DRDO द्वारा भारत में विकसित किया जा रहा एक नई पीढ़ी का लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसमें इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं।
प्रश्न: प्रोजेक्ट कुशा की मिसाइलों की क्या क्षमता है?
उत्तर: प्रोजेक्ट कुशा के तहत M1 (150 किमी), M2 (250 किमी) और M3 (350-400 किमी) रेंज की मिसाइलें विकसित की जा रही हैं, जो S-400 सिस्टम के समकक्ष या उससे बेहतर होंगी।
प्रश्न: ये मिसाइलें S-400 से कैसे बेहतर होंगी?
उत्तर: प्रोजेक्ट कुशा मिसाइलें स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं और इन्हें भारतीय विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य S-400 के समान या उससे बेहतर प्रदर्शन देना है।
