परीक्षा पे चर्चा: तनाव प्रबंधन और सीखने का महत्व
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2018 में शुरू किया गया ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम आज करोड़ों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसका उद्देश्य छात्रों के परीक्षा तनाव को कम करना और सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाना है। वर्ष 2025 में, इस कार्यक्रम ने 3.53 करोड़ से अधिक पंजीकरण के साथ एक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया, जिसकी कुल पहुंच 21 करोड़ से अधिक दर्शकों तक थी, जिसमें विदेश स्थित भारतीय स्कूल भी शामिल थे।

परीक्षाएं केवल एक पड़ाव, अंतिम लक्ष्य नहीं
प्रधानमंत्री बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि परीक्षाएं जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि सीखने की यात्रा का सिर्फ एक प्रमुख चरण हैं। वे कहते हैं कि परीक्षा केवल किसी विशेष क्षण में आपकी तैयारी को मापती है, जबकि सीखना एक सतत और आनंददायक प्रक्रिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 में ‘आजीवन सीखने की अवधारणा’ को गहराई से महत्व दिया गया है।
मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
‘परीक्षा पे चर्चा’ पहल में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है। विशेषज्ञों द्वारा तनाव कम करने के कई प्रभावी तरीके बताए जाते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक: यह इंद्रिय आधारित ध्यान अभ्यास है जो विचारों की दौड़ को शांत करने और वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है।
- पर्याप्त नींद लेना।
- पर्याप्त पानी पीना।
- नियमित व्यायाम करना।
- ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास करना।
खेल जगत की हस्तियों ने भी अपने अनुभव साझा करते हुए बताया है कि खेल न केवल पढ़ाई में बाधा नहीं हैं, बल्कि वे तनाव कम करने और ध्यान केंद्रित करने में भी सहायक होते हैं।
डिजिटल मीडिया और स्वस्थ सीमाएं
डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रचलन से ‘डिजिटल डिमेंशिया’ जैसी आशंकाएं बढ़ रही हैं, जिससे मस्तिष्क के उन क्षेत्रों में ग्रे मैटर की कमी हो सकती है जो भावनात्मक विनियमन और आवेग नियंत्रण के लिए जिम्मेदार होते हैं। तकनीकी विशेषज्ञों ने छात्रों को सलाह दी है कि वे मोबाइल और डिजिटल साधनों का नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल करें ताकि तकनीक मददगार बने, बोझ नहीं।
अभिभावकों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका
यह कार्यक्रम अभिभावकों को भी महत्वपूर्ण संदेश देता है कि वे बच्चों का ध्यान केवल अंकों पर न लगाएं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया पर केंद्रित रखें। उन्हें बच्चों की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए और घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां बच्चे अपने डर, चुनौतियों और उम्मीदों को खुलकर साझा कर सकें।
शिक्षकों से अपील की गई है कि वे रटने की संस्कृति से आगे बढ़कर आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा दें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, ‘परीक्षा पे चर्चा’ छात्र-केंद्रित, तनाव-मुक्त और अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर देती है। मूल्यांकन प्रणाली में भी बदलाव की जरूरत है ताकि परीक्षाएं केवल याददाश्त नहीं, बल्कि समझ, अनुप्रयोग और विकास को माप सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छात्रों के परीक्षा तनाव को कम करने, सीखने को आनंददायक बनाने और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया एक वार्षिक कार्यक्रम है।
प्रश्न: 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक क्या है?
उत्तर: यह एक संवेदी-आधारित ध्यान तकनीक है जो वर्तमान क्षण पर ध्यान केंद्रित करने और चिंता को कम करने के लिए पांच इंद्रियों (5 चीजें जो आप देख सकते हैं, 4 चीजें जो आप छू सकते हैं, 3 चीजें जो आप सुन सकते हैं, 2 चीजें जो आप सूंघ सकते हैं, 1 चीज जो आप चख सकते हैं) का उपयोग करती है।
प्रश्न: अभिभावक बच्चों की परीक्षा तैयारी में कैसे मदद कर सकते हैं?
उत्तर: अभिभावकों को अंकों पर नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, बच्चों की तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए, और घर में एक सहायक माहौल बनाना चाहिए जहाँ बच्चे खुलकर अपनी बातें साझा कर सकें।
निष्कर्ष
‘परीक्षा पे चर्चा’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका स्पष्ट संदेश है कि परीक्षाएं बोझ नहीं, बल्कि सीखने, बढ़ने और खुद को बेहतर समझने के अवसर हैं।