मोबाइल गेम बच्चों का मस्तिष्क ‘हाईजैक’ कर रहा: विशेषज्ञ चेतावनियां

मोबाइल गेम बच्चों का मस्तिष्क

आजकल मोबाइल गेम सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहे, बल्कि ये बच्चों के मस्तिष्क को गंभीर रूप से प्रभावित कर उसे ‘हाईजैक’ कर सकते हैं। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि कैसे ये गेम डोपामाइन स्राव को बदलकर बच्चों के वास्तविक जीवन की उपलब्धियों के प्रति उनकी रुचि कम कर रहे हैं।

मोबाइल गेम बच्चों का मस्तिष्क
मोबाइल गेम बच्चों का मस्तिष्क

मोबाइल गेम और मस्तिष्क का रिवॉर्ड सिस्टम

मस्तिष्क विज्ञान विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल गेम खेलने से मिलने वाली त्वरित खुशी मस्तिष्क में डोपामाइन का स्राव तेज करती है। यह बच्चों को मेहनत, धैर्य और समय के साथ मिलने वाली वास्तविक उपलब्धियों को फीका लगने लगता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के बिहेवियरल एडिक्शन क्लिनिक (बीएसी) से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. यतन पाल सिंह बल्हारा बताते हैं कि मोबाइल गेम बच्चों के मस्तिष्क के रिवॉर्ड सिस्टम (पुरस्कार प्रणाली) को अपने नियंत्रण में ले लेते हैं।

हर लेवल पूरा होने, अंक मिलने या वर्चुअल इनाम पर डोपामाइन का स्राव होता है, जो मस्तिष्क को बार-बार उसी उत्तेजना की मांग करना सिखा देता है। डॉक्टर बल्हारा समझाते हैं कि वास्तविक जीवन में खुशी पाने की प्रक्रिया धीमी लेकिन टिकाऊ होती है, जबकि मोबाइल गेम कुछ ही मिनटों में बिना मेहनत वही पुरस्कार दे देते हैं, पर ये अस्थाई होते हैं। इससे मस्तिष्क सीख लेता है कि कम प्रयास में अधिक खुशी कहां मिल रही है, जिससे गेमिंग का समय बढ़ता जाता है और पढ़ाई, खेलकूद व परिवार के साथ समय बिताना उबाऊ लगने लगता है।

डोपामाइन क्या है?

डोपामाइन शरीर के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क और तंत्रिकाओं में संदेशों के आदान-प्रदान का काम करता है। यह मस्तिष्क में खुशी, पुरस्कार, अनुभव, प्रेरणा, सीखने और निर्णय लेने जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। भोजन, सामाजिक जुड़ाव या मोबाइल गेम से मिलने वाली तुरंत खुशी डोपामाइन के तेज स्राव से होती है। इसका संतुलन मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद, लत और आक्रामक व्यवहार को प्रभावित करता है।

बच्चों को मोबाइल गेम की लत से बचाने के उपाय

  • बच्चों पर अचानक प्रबंध न लगाएं, बल्कि स्क्रीन समय धीरे-धीरे कम करें।
  • बच्चों से खुलकर संवाद करें और समझें कि उन्हें गेम में क्या आकर्षित करता है।
  • वास्तविक जीवन में छोटे-छोटे इनाम देकर उन्हें प्रेरित करें।
  • परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं और मिलकर गतिविधियां करें।
  • भोजन के समय फोन मुक्त संवाद की आदत डालें।
  • यदि बच्चे में चिड़चिड़ापन, नींद खराब होने या पढ़ाई में गिरावट दिखे, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: मोबाइल गेम बच्चों के मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करते हैं?

A: मोबाइल गेम मस्तिष्क में डोपामाइन के त्वरित स्राव को बढ़ाते हैं, जिससे बच्चों को वास्तविक जीवन की उपलब्धियाँ कम आकर्षक लगने लगती हैं और वे बार-बार गेमिंग की उत्तेजना की तलाश करते हैं।

Q: डोपामाइन क्या है और इसका क्या काम है?

A: डोपामाइन एक न्यूरोट्रांसमीटर है जो मस्तिष्क में खुशी, पुरस्कार, प्रेरणा और सीखने जैसी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह तुरंत खुशी देने वाली गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Q: बच्चों को मोबाइल गेम की लत से कैसे बचाया जा सकता है?

A: स्क्रीन समय धीरे-धीरे कम करें, बच्चों से संवाद करें, उन्हें वास्तविक जीवन के इनाम दें, परिवार के साथ समय बिताएं और विशेषज्ञ की सलाह लें यदि समस्या गंभीर हो।

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