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मेरठ खजूरी पर्यटन पार्क: जहां गंदगी थी, अब वहां सेल्फी ले रहे लोग

मेरठ खजूरी पर्यटन पार्क

गांव हो या शहर, गंदगी एक आम समस्या है, जिससे निपटना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है। लेकिन मेरठ जिले की ग्राम पंचायत खजूरी ने इस चुनौती को अवसर में बदल दिया है। जहां कभी लोग नाक बंद कर गुजरते थे, आज वहीं सेल्फी लेने के लिए रुकते हैं।

मेरठ खजूरी पर्यटन पार्क

खजूरी ग्राम पंचायत का अनोखा प्रयास: कूड़े से पर्यटन पार्क तक

मेरठ के खजूरी गांव में ग्राम समाज की एक उपेक्षित जमीन पर कूड़े के ढेर लगे रहते थे। यह स्थान ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब था। लेकिन ग्राम पंचायत खजूरी ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन से इस स्थान को एक खूबसूरत पर्यटन पार्क का रूप दे दिया है।

एक गंदगी भरी जगह, अब बन गई सेल्फी पॉइंट

ग्राम पंचायत ने अपनी निधि का उपयोग करते हुए इस बंजर और गंदे स्थान पर हरियाली और सुंदरता भर दी है।

ग्राम पंचायत के लिए आय का स्रोत

इस पर्यटन पार्क ने न केवल गांव की सुंदरता बढ़ाई है, बल्कि ग्राम पंचायत के लिए आय का एक नया स्रोत भी खोला है। इको-फ्रेंडली टी स्टॉल को 5000 रुपये प्रतिमाह के किराए पर दिया गया है, जिससे ग्राम पंचायत की आमदनी में वृद्धि हो रही है। लोग यहां चाय का लुत्फ उठाते हैं और साथ ही मनोरम दृश्यों के साथ सेल्फी भी लेते हैं।

एक प्रेरणादायक पहल

खजूरी ग्राम पंचायत का यह प्रयास यह दर्शाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और सही प्रबंधन से किसी भी गांव को एक आकर्षक पर्यटन स्थल में बदला जा सकता है। यह अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी एक बेहतरीन प्रेरणा है कि कैसे स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर ग्रामीण विकास किया जा सकता है।

“जहां गंदगी थी, अब वहां हरियाली और खुशहाली है।”

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: मेरठ के खजूरी गांव में पहले क्या था?

उत्तर: मेरठ के खजूरी गांव में जिस स्थान पर अब पर्यटन पार्क है, वहां पहले ग्राम समाज की जमीन पर कूड़े के ढेर लगे रहते थे और लोग नाक बंद कर गुजरते थे।

प्रश्न: खजूरी पर्यटन पार्क कैसे विकसित किया गया?

उत्तर: ग्राम पंचायत खजूरी ने अपनी निधि का उपयोग करके इस उपेक्षित स्थान को एक खूबसूरत पर्यटन पार्क में बदल दिया। इसमें सुसज्जित ट्रैक, आकर्षक बेंच, सुंदर हट और एक इको-फ्रेंडली टी स्टॉल शामिल हैं।

प्रश्न: इस पार्क से ग्राम पंचायत को क्या लाभ हो रहा है?

उत्तर: इस पार्क से गांव में गंदगी खत्म हुई, हरियाली बढ़ी और यह ग्रामीणों व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया। साथ ही, इको-फ्रेंडली टी स्टॉल को किराए पर देने से ग्राम पंचायत को 5000 रुपये प्रतिमाह की अतिरिक्त आय भी हो रही है।

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