बीएचयू के शोधकर्ताओं ने एमबीबीएस परीक्षा मूल्यांकन में एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। अब वायस-टू-टेक्स्ट तकनीक और एक्सेल ऑटोमेशन की मदद से कापियां जांचने में लगने वाला समय घंटों से मिनटों में सिमट जाएगा। यह न केवल शिक्षकों के बोझ को कम करेगा, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया में सटीकता भी बढ़ाएगा।

बीएचयू की नई तकनीक
मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करना एक बड़ी चुनौती बन गई थी। पारंपरिक तरीके से मूल्यांकन न केवल समय लेने वाला और थकाऊ था, बल्कि इसमें मानवीय त्रुटियों की भी संभावना रहती थी। इसी समस्या का समाधान करने के लिए बीएचयू के फिजियोलॉजी विभाग ने वायस-टू-टेक्स्ट (वीटीटी) और एक्सेल ऑटोमेशन को मिलाकर एक प्रभावी और कम खर्चीली प्रणाली विकसित की है।
मूल्यांकन के तीन चरण
यह नई मूल्यांकन प्रणाली तीन मुख्य चरणों में पूरी होती है:
- रिकॉर्डिंग और टेक्स्ट रूपांतरण: शिक्षक छात्रों के उत्तरों को बोलकर रिकॉर्ड करते हैं, जिसे वायस-टू-टेक्स्ट तकनीक तुरंत लिखित रूप में बदल देती है।
- डेटा संगठन: लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) की सहायता से बिखरे हुए डेटा को व्यवस्थित कर तालिका (टेबल) के रूप में ढाला जाता है।
- अंकों की गणना: एमएस एक्सेल के फ़ार्मूलों का उपयोग करके कुछ ही सेकंड में अंकों की सटीक गणना की जाती है।
पारंपरिक बनाम नई पद्धति: समय और सटीकता
इस तकनीक का परीक्षण करीब तीन हजार उत्तरों पर किया गया, जिसके परिणाम बेहद प्रभावशाली रहे। पारंपरिक पद्धति से मूल्यांकन में औसतन 194.82 मिनट (लगभग 3.25 घंटे) लगते थे, जबकि नई तकनीक से यह समय घटकर मात्र 45.9 मिनट रह गया। खास बात यह है कि दोनों ही तरीकों में सटीकता 99.96 प्रतिशत पाई गई, जिससे शुद्धता से कोई समझौता नहीं हुआ।
अन्य शैक्षिक संस्थानों के लिए उपयोगिता
शोधकर्ताओं का मानना है कि यह तकनीक उन मेडिकल कॉलेजों और अन्य शैक्षिक संस्थानों के लिए अत्यधिक उपयोगी साबित होगी, जहाँ संसाधन और स्टाफ सीमित हैं। यह पद्धति पूरे देश में परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को अधिक कुशल और सटीक बनाने की क्षमता रखती है। इस शोध को हाल ही में आंध्र प्रदेश के ‘इंटरनेशनल जनरल आफ मेडिसिन एंड फार्मास्यूटिकल रिसर्च’ में प्रकाशित किया गया है।
शिक्षक ऐसे बना सकेंगे मूल्यांकन आसान
बीएचयू के फिजियोलॉजी विभाग के डॉक्टर संकल्प झा ने बताया कि इस प्रक्रिया के लिए केवल तीन चीजों की आवश्यकता होती है: एक लैपटॉप या कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन और संबंधित सॉफ्टवेयर। मूल्यांकन के चरणबद्ध तरीके से:
- वायस टाइपिंग: गूगल डॉक्स खोलकर वायस टाइपिंग ऑन करें। छात्रों की कापियां एक-एक करके उठाएं और उनके चुने गए विकल्पों को बोलें (भ्रम से बचने के लिए कोडिंग जैसे ‘ए के लिए अल्फा’, ‘बी के लिए ब्रावो’ का उपयोग कर सकते हैं)।
- टेक्स्ट को व्यवस्थित करना: गूगल डॉक्स पूरे उत्तरों को टेक्स्ट में बदल देगा। इस टेक्स्ट को कॉपी करें और एक एआई टूल की मदद से रोल नंबर और उत्तर वाले टेबल फॉर्मेट में बदलें, जिसे एक्सेल में पेस्ट किया जा सके।
- एक्सेल में गणना: तैयार टेबल को एमएस एक्सेल में पेस्ट करें और सही उत्तरों को अलग सेल में दर्ज करें। एक्सेल के IF या EXTRACT फ़ार्मूलों का उपयोग करके उत्तरों का मिलान करें।
- स्कोर प्राप्त करें: अंत में, ऑटो-सम बटन दबाते ही हर छात्र का कुल स्कोर तुरंत तैयार हो जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- Q: एमबीबीएस परीक्षा मूल्यांकन की नई तकनीक क्या है?
A: यह बीएचयू द्वारा विकसित वायस-टू-टेक्स्ट और एक्सेल ऑटोमेशन पर आधारित एक प्रणाली है जो उत्तर पुस्तिकाओं को घंटों के बजाय मिनटों में जांचती है।
- Q: यह तकनीक कितनी सटीक है?
A: पारंपरिक पद्धति के समान, इस नई तकनीक में भी 99.96% की उच्च सटीकता पाई गई है।
- Q: क्या इस तकनीक का उपयोग अन्य शैक्षणिक संस्थान भी कर सकते हैं?
A: हाँ, यह तकनीक उन सभी शैक्षिक संस्थानों के लिए उपयोगी है जहाँ संसाधन और स्टाफ सीमित हैं।