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मंदिर में सरकारी नौकरी की तैयारी: परसदा गांव का अनोखा मॉडल

मंदिर में सरकारी नौकरी की तैयारी पर ताज़ा अपडेट: पूरी जानकारी नीचे पढ़ें।

परसदा गांव का मंदिर: आस्था के साथ सरकारी नौकरी का द्वार

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में परसदा गांव स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर अब सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का एक जीवंत हब बन चुका है। यहां सामुदायिक सहयोग से विकसित अध्ययन व्यवस्था ने गांव के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का एक नया रास्ता खोल दिया है। यह अनूठा मॉडल ग्रामीण अंचल में सरकारी नौकरी की नई उम्मीद जगा रहा है।

कैसे हुई पाठशाला की शुरुआत?

लक्ष्मी नारायण मंदिर में यह पाठशाला 1985 में शुरू हुई थी। उस समय गांव के इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के अध्यापक नहीं थे। गांव के ही विशुन कुमार ने अंग्रेजी में एमए करने के बाद कॉलेज के विद्यार्थियों के आग्रह पर मंदिर में निःशुल्क पढ़ाना शुरू किया। यह व्यवस्था कई वर्षों तक चली, और कुछ साल पहले इसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों ने संचालित करना शुरू कर दिया।

सामूहिक प्रयास और सफलता की कहानी

पिछले 5 वर्षों में इस अनूठी पहल से 26 युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। इस मॉडल की खासियत यह है कि अभ्यर्थी छात्र भी हैं और शिक्षक भी। जिस विषय में जिसकी पकड़ मजबूत होती है, वही दूसरों को पढ़ाता है। इसी साझा प्रयास से तैयारी आगे बढ़ती है।

छात्र-शिक्षक मॉडल: एक अनूठी पहल

इन सभी सफल अभ्यर्थियों ने इसी पाठशाला से तैयारी कर सफलता पाई और अब वे दूसरों को मार्गदर्शन दे रहे हैं।

कई गांवों के जुड़े प्रतियोगी

वर्तमान में पाठशाला में परसदा के साथ ही किन्हौटी, चितरेहटापुरवा, कटिया, गोपालपुर, सुरजनपुर, दौलतपुर, सलहाबाद, भादेफर, शेखवापुर, पकरिया, रामशाला सहित कई गांवों के 50 से अधिक अभ्यर्थी तैयारी कर रहे हैं।

आर्थिक बोझ और चिंता से मुक्ति

यह व्यवस्था केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है। सफल अभ्यर्थी नए छात्रों के फॉर्म भरने में मदद करते हैं। परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और ठहरने की व्यवस्था भी सुनिश्चित करते हैं। पुनीत द्विवेदी, सूरज अग्निहोत्री, विवेक सिंह, अनुपम पांडेय जैसे तैयारी कर रहे छात्रों ने बताया कि उन्हें फॉर्म भरने या परीक्षा देने जाने की चिंता नहीं रहती। सफल अभ्यर्थी वाहन और परीक्षा केंद्र के नजदीक ठहरने की व्यवस्था भी कर देते हैं। इससे आर्थिक बोझ कम होता है और गांव के युवाओं को शहर जैसी तैयारी का माहौल मिलता है।

FAQ: मंदिर में सरकारी नौकरी की तैयारी

प्रश्न: परसदा मंदिर पाठशाला क्या है?

उत्तर: यह सीतापुर जिले के परसदा गांव में स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में चलने वाली एक अनूठी अध्ययन व्यवस्था है, जहां ग्रामीण युवा सामूहिक सहयोग से सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

प्रश्न: इस मॉडल की खासियत क्या है?

उत्तर: इसकी खासियत है ‘छात्र-शिक्षक मॉडल’, जिसमें अभ्यर्थी स्वयं एक-दूसरे को पढ़ाते हैं। सफल छात्र नए अभ्यर्थियों को फॉर्म भरने, परीक्षा केंद्र तक पहुंचने और ठहरने में भी मदद करते हैं।

प्रश्न: कितने छात्रों को सफलता मिली है?

उत्तर: पिछले 5 वर्षों में इस पहल से 26 से अधिक युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है।

प्रश्न: छात्रों को और क्या मदद मिलती है?

उत्तर: पढ़ाई के साथ-साथ सफल अभ्यर्थी नए छात्रों के फॉर्म भरने में मदद करते हैं, और परीक्षा के लिए शहर जाने व ठहरने की व्यवस्था भी करते हैं, जिससे आर्थिक बोझ कम होता है।

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