इलाहाबाद हाई कोर्ट का क्लैट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट पर महत्वपूर्ण फैसला
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (क्लैट) यूजी 2026 की मेरिट लिस्ट को पुनरीक्षित करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति विवेक शरण की पीठ ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कंसोर्सियम को निर्देश दिया है कि एक विवादित प्रश्न के दो विकल्पों ‘बी’ और ‘डी’ दोनों को सही मानकर मेरिट लिस्ट को संशोधित किया जाए। कोर्ट ने एक महीने के भीतर संशोधित सूची प्रकाशित करने का आदेश दिया है।

विवादित प्रश्न और कोर्ट का तर्क
गाजियाबाद निवासी अवनीश गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया। याचिकाकर्ता के प्रश्न संख्या 9 के लिए विशेषज्ञ समिति ने ‘बी’ और ‘डी’ दोनों उत्तरों को सही माना था, लेकिन ओवरसाइट कमेटी ने केवल ‘बी’ को सही माना। कोर्ट ने ओवरसाइट कमेटी के इस निर्णय को निराधार और अतार्किक बताया, यह कहते हुए कि विशेषज्ञ समिति का निर्णय ही मान्य होगा।
छात्रों पर फैसले का असर
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले दौर की काउंसलिंग में जिन छात्रों को प्रवेश मिल चुका है, उनकी सीटें नहीं बदली जाएंगी। हालांकि, आगे की सभी काउंसलिंग संशोधित मेरिट लिस्ट के अनुरूप ही होंगी। इस फैसले से अवनीश गुप्ता को बढ़े हुए अंक मिलेंगे, जिससे उनकी रैंकिंग में सुधार होगा।
न्यायिक हस्तक्षेप पर कानूनी बहस
प्रतिपक्षी के वकीलों ने तर्क दिया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस मामले में सुनवाई का अधिकार नहीं है क्योंकि अथॉरिटी कर्नाटक में पंजीकृत है और सभी प्रक्रियाएं वहीं की गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को परीक्षा मूल्यांकन जैसे विशेषज्ञों के क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि यदि कार्रवाई का कोई भी कारण अदालत के क्षेत्र में आता है, तो उसे सुनवाई का अधिकार है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्लैट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट क्यों संशोधित की जा रही है?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक विवादित प्रश्न के दो सही उत्तर पाए जाने के कारण क्लैट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट को पुनरीक्षित करने का आदेश दिया है।
किसने मेरिट लिस्ट को संशोधित करने का आदेश दिया है?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कंसोर्सियम को क्लैट यूजी 2026 की मेरिट लिस्ट संशोधित करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले का छात्रों पर क्या असर होगा?
पहले चरण की काउंसलिंग में प्रवेश पा चुके छात्रों की सीटें अप्रभावित रहेंगी, लेकिन भविष्य की सभी काउंसलिंग संशोधित मेरिट लिस्ट के आधार पर होंगी। याचिकाकर्ता अवनीश गुप्ता जैसे छात्रों को बढ़ी हुई रैंकिंग का लाभ मिलेगा।