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छोटे यूपीआई लेनदेन से बैंक परेशान: लागत और नोटों की कमी

छोटे यूपीआई लेनदेन

छोटे यूपीआई लेनदेन: बैंकों की बढ़ती चिंता

यूपीआई के माध्यम से किए जाने वाले छोटे लेनदेन, जैसे 5, 7 या 10 रुपये का भुगतान, ग्राहकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए हैं। ग्राहकों को जेब में खुले पैसे रखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे यह उनके लिए अधिक सुविधाजनक है। हालांकि, ग्राहकों की यह सुविधा बैंकों के लिए एक बड़ी परेशानी बन गई है, क्योंकि इन छोटे भुगतानों को प्रोसेस करने की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।

छोटे यूपीआई लेनदेन

छोटे नोटों की किल्लत और RBI का रुख

दैनिक जागरण से हुई बातचीत में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों ने बताया कि बैंकिंग प्रणाली में छोटे नोटों की किल्लत एक प्रमुख कारण है जिसके चलते यूपीआई के जरिए ऐसे लेनदेन बढ़ गए हैं। उनका अनुमान है कि छोटे नोटों की इस कमी को दूर करने में लगभग दो वर्ष का समय लग सकता है।

29 मई, 2026 को जारी RBI की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक कुल प्रचलित बैंक नोटों में 2 और 5 रुपये के मूल्यवर्ग के नोटों की हिस्सेदारी घटकर 6.4 प्रतिशत रह गई, जो पिछले वर्ष 7.5 प्रतिशत थी। इसी तरह, 10 और 20 रुपये के मूल्यवर्ग के नोटों की हिस्सेदारी भी क्रमशः 17 प्रतिशत से 16.1 प्रतिशत और 9.1 प्रतिशत से 8.2 प्रतिशत तक घट गई है। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि कुल प्रचलित मुद्रा में 500 और 100 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जबकि छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की उपलब्धता लगातार कम हो रही है।

यूपीआई लेनदेन पर लागत का बोझ

यूपीआई ट्रांजेक्शन पर बैंकों का औसतन खर्च 1-2 रुपये का होता है। हालांकि, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) का प्रति ट्रांजेक्शन खर्च बहुत कम होता है, लेकिन लेनदेन की संख्या में लगातार वृद्धि के साथ, बैंकों को अपने आईटी सिस्टम पर अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है।

एटीएम अपग्रेड और शुल्क का मुद्दा

यूपीआई भुगतान पर ग्राहकों को कोई शुल्क नहीं देना पड़ता, इसलिए पूरी लागत बैंकों को वहन करनी पड़ती है। बैंक लगातार RBI से अपील कर रहे हैं कि एक निश्चित सीमा (जैसे 1000 रुपये) के बाद यूपीआई के इस्तेमाल पर शुल्क लगाने की अनुमति दी जाए। RBI इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाएगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पहले कहा था कि यूपीआई हमेशा शुल्क मुक्त नहीं रह सकता है। हालांकि, बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि फिलहाल यूपीआई पर शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस बीच, RBI ने बैंकों को निर्देश दिया था कि वे 50-100 रुपये के नोटों को ज्यादा वितरित करने की व्यवस्था करें। हालांकि, इसके लिए बैंकों को अपने एटीएम को अपग्रेड करना होगा, जिसका वित्तीय खर्च अधिक है, और कई बैंक इसके लिए तैयार नहीं हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: बैंक छोटे यूपीआई लेनदेन से क्यों परेशान हैं?

उत्तर: बैंक छोटे यूपीआई लेनदेन से इसलिए परेशान हैं क्योंकि इन भुगतानों को प्रोसेस करने की लागत बढ़ रही है, जबकि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। साथ ही, छोटे मूल्यवर्ग के नोटों की कमी भी एक कारण है।

प्रश्न: क्या आरबीआई यूपीआई पर शुल्क लगाने की अनुमति देगा?

उत्तर: बैंक आरबीआई से यूपीआई पर शुल्क लगाने की अनुमति देने की अपील कर रहे हैं। आरबीआई इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार लेगी। फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

प्रश्न: छोटे नोटों की किल्लत का क्या कारण है?

उत्तर: छोटे नोटों की किल्लत के कारणों में छपाई की बढ़ती लागत और वितरण प्रणाली में कमी शामिल है, जिससे बाजार में उनकी उपलब्धता कम हो गई है।

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