Site icon Samachar Jagran

छोटे शहरों से विकसित भारत का मार्ग: बजट 2026 की झलक

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य व अर्थशास्त्री प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने बताया कि छोटे शहरों से विकसित भारत का मार्ग प्रशस्त होगा। हाल ही में पेश किए गए बजट में इसकी स्पष्ट झलक दिखी, जहां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए टियर-टू व टियर-थ्री शहरों में सिटी इकोनॉमिक जोन विकसित करने का निर्णय लिया गया है। इससे ‘एक जिला, एक उत्पाद’ का संकल्प पूरा होगा और गांव-कस्बों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। शहरों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 5000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे इन छोटे शहरों की तस्वीर बदलेगी और इसी से छोटे शहरों से विकसित भारत का स्वप्न साकार होगा।

बजट 2026: छोटे शहरों से विकसित भारत की राह

प्रोफेसर वल्लभ ने दैनिक जागरण के राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम में बजट पर चर्चा करते हुए कहा कि देश में एमएसएमई से 11 करोड़ लोग सीधे जुड़े हुए हैं। इन्हें बढ़ावा देने के लिए बजट में ‘एमएसएमई चैंपियन’ व ‘कॉर्पोरेट मित्र’ का भी प्रावधान किया गया है। ये छोटे उद्यमों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और उन्हें बड़ा बनाने में मदद करेंगे। यह कदम निश्चित तौर पर छोटे शहरों से विकसित भारत की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

बजट के तीन ‘M’ और उनका प्रभाव

प्रोफेसर वल्लभ ने बजट में तीन ‘एम’ पर विशेष फोकस की बात कही। ये हैं:

इन नीतियों के कारण भारत बीते 11 वर्षों में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक मार्केट के रूप में उभरा है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब 6 गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे इसका बाजार मूल्य 4.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बजट में डोमेस्टिक कंटेनर टूल रूम को हाईटेक बनाने, इलेक्ट्रॉनिक कॉम्पोनेंट्स और बायोफार्मा के साथ ही केयर टेकर्स जैसे सर्विस सेक्टर को भी मजबूती दी गई है।

मध्यवर्ग और ग्रामीण विकास पर ध्यान

चर्चा के दौरान प्रोफेसर गौरव ने बताया कि बजट में एमएसएमई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर खास जोर दिया गया है, जिसका सीधा लाभ मध्यवर्ग को मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह दौर चला गया जब वस्तुओं के महंगे या सस्ते होने से बजट को अच्छा या खराब बताया जाता था। दुनिया की बड़ी इकोनॉमी कृषि पर चलती है। बजट में भले ही कृषि के लिए तीन प्रतिशत का आवंटन किया गया हो, लेकिन इससे ग्रामीण विकास व ग्रामीण रोजगार में संपन्नता आएगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च: नए भारत की नींव

प्रोफेसर गौरव ने बताया कि करीब 53.5 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है, जिसमें राजस्व खर्च को काफी कम किया गया है। पूंजीगत खर्च के लिए 12.20 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो बीते 11 वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 6 गुना तक हो गया है। यह पूरा पैसा देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर खर्च किया जाएगा। बजट में रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार को बढ़ावा देने के साथ ही दुनिया में पहली बार ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इससे स्कूल व कॉलेज स्तर पर कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल क्रिएटिविटी को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, बड़े औद्योगिक क्षेत्रों व इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के आसपास ही पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी, जिनमें शोध संस्थान से लेकर आवासीय परिसर तक होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q1: विकसित भारत 2047 का मार्ग किन शहरों से प्रशस्त होगा?

A1: प्रोफेसर गौरव वल्लभ के अनुसार, विकसित भारत 2047 का मार्ग भारत के छोटे शहरों से होकर निकलेगा।

Q2: बजट 2024 में MSME को बढ़ावा देने के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?

A2: सरकार ने टियर-टू व टियर-थ्री शहरों में सिटी इकोनॉमिक जोन विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, MSME चैंपियन व कॉर्पोरेट मित्र का भी प्रावधान किया गया है।

Q3: बजट में ‘तीन एम’ का क्या अर्थ है?

A3: ये तीन एम हैं – मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, MSME का सशक्तिकरण और मेंटिनेंस ऑफ रिफॉर्म्स (नियमों में बदलाव) को जारी रखना।

संबंधित लेख

और पढ़ें

Exit mobile version