चंदौली में ई-उर्वरक ऐप: पारदर्शी वितरण से किसानों को मिलेगी राहत

चंदौली में ई-उर्वरक ऐप

चंदौली में ई-उर्वरक ऐप से उर्वरक वितरण की नई व्यवस्था

चंदौली जनपद में सहकारी समितियों पर उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए सहकारिता विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब ‘ई-उर्वरक ऐप’ आधारित डिजिटल प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे किसानों को समय पर और बिना किसी परेशानी के उर्वरक उपलब्ध हो सकेगा। यह नई प्रणाली खरीफ सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी, जिसका मुख्य उद्देश्य कालाबाजारी को रोकना और किसानों को लंबी कतारों से मुक्ति दिलाना है।

चंदौली में ई-उर्वरक ऐप
चंदौली में ई-उर्वरक ऐप

यह व्यवस्था किसानों के लिए कई मायनों में लाभकारी सिद्ध होगी, जिससे कृषि क्षेत्र में दक्षता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

किसानों को मिलने वाले मुख्य लाभ

  • समय पर उर्वरक की उपलब्धता: किसान अपनी आवश्यकतानुसार सही समय पर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
  • लंबी कतारों से मुक्ति: ऐप आधारित प्रणाली से किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  • कालाबाजारी पर रोक: डिजिटल रिकॉर्ड होने से उर्वरक की कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगेगा।
  • पारदर्शी वितरण: सभी लेनदेन का रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी।

चंदौली में उर्वरक की आवश्यकता और आपूर्ति

जनपद में कुल 83 वी पैक्स (PACS) सहकारी समितियां कार्यरत हैं, जिनसे लगभग 1.05 लाख कृषक परिवार जुड़े हुए हैं। ये किसान उर्वरक, बीज, ऋण और सहज जनसेवा केंद्र जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। खरीफ सत्र में लगभग 1.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती होती है, जिसके लिए उर्वरक की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, खरीफ में निम्नलिखित उर्वरकों की अनुमानित आवश्यकता है:

  • नाइट्रोजन: 17,393 टन
  • डीएफपी: 3,592 टन
  • एमओपी: 587 टन
  • एनपीकेएस: 1,79 टन
  • एसएसपी: 10,639 टन

मांग के अनुरूप, सीजन शुरू होने से पहले ही 95% भंडारण सुनिश्चित करने के साथ-साथ समयबद्ध वितरण की योजना भी तैयार की जा रही है।

ई-उर्वरक ऐप पर पंजीकरण और उपयोग

नई व्यवस्था के तहत, केवल वी पैक्स समितियों के पंजीकृत सदस्य किसानों को ही इस ई-उर्वरक ऐप के माध्यम से उर्वरक दिया जाएगा। सदस्यता शुल्क 226 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसे 30 अप्रैल तक जमा करना अनिवार्य होगा। एक बार पंजीकृत होने के बाद, किसान अपने मोबाइल फोन पर ऐप के जरिए उर्वरक की उपलब्धता, स्टॉक की स्थिति और अपनी खरीद का विस्तृत विवरण आसानी से देख सकेंगे। प्रत्येक लेनदेन का रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सकेगा और जवाबदेही बढ़ेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ई-उर्वरक ऐप कब से प्रभावी होगा?

ई-उर्वरक ऐप आधारित डिजिटल प्रणाली खरीफ सत्र 2026-27 से प्रभावी होगी।

ई-उर्वरक ऐप का उपयोग कौन कर सकता है?

केवल वी पैक्स (PACS) सहकारी समितियों के पंजीकृत सदस्य किसान ही इस ऐप का उपयोग कर सकेंगे। सदस्यता शुल्क 226 रुपये है जिसे 30 अप्रैल तक जमा करना होगा।

ई-उर्वरक ऐप से किसानों को क्या लाभ मिलेंगे?

किसानों को समय पर उर्वरक मिलेगा, लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी, कालाबाजारी पर रोक लगेगी और उर्वरक वितरण में पूरी पारदर्शिता आएगी।

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