कैंसर से बचाव: कम उम्र में बढ़ते खतरे और रोकथाम के उपाय

आज विश्व कैंसर दिवस है। इस वर्ष की थीम ‘यूनाइटेड बाय यूनीक’ है। लगभग हर परिवार में अब कोई न कोई कैंसर से पीड़ित या परिचित मिल सकता है। फेफड़े, मुंह और स्तन जैसे कई कैंसर के उपचार में सफलता मिल रही है, लेकिन राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (2024) के अनुमान के मुताबिक, 25 लाख भारतीय कैंसर पीड़ित हैं, जो तीन दशकों में 26% बढ़ा है। कैंसर से बचाव के लिए समय पर जांच और रोकथाम अनिवार्य है। इसके बाद सर्जरी, रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी जैसे उपचार कारगर हो सकते हैं।

कैंसर जैसी बीमारियों में प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) सबसे अग्रिम कवच है, जो कैंसर की आशंकाओं को रोकता है। इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज में एक नया और कारगर तरीका है, जो शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।

कैंसर क्या है?

कैंसर बीमारियों का एक समूह है जिसमें असामान्य कोशिकाएं बेकाबू होकर सामान्य कोशिकाओं की जगह ले लेती हैं। शरीर के किसी एक हिस्से में ये कोशिकाएं अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती हैं, जिससे मेटास्टेसिस होकर मृत्यु भी हो सकती है। जीन में बदलाव के चलते कैंसर कोशिकाएं असामान्य हो जाती हैं। कुछ बदलाव एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जा सकते हैं, और कुछ मामलों में बढ़ती उम्र में यह समस्या होने की आशंका होती है। कैंसर कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ती और विभाजित होती हैं, जिससे सामान्य कोशिकाएं बाधित होने लगती हैं। सभी कैंसर कोशिकाएं ट्यूमर से नहीं होती और सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते। कैंसर कोशिकाएं एक साथ मिलकर ट्यूमर बनाती हैं।

भोजन और कैंसर का जोखिम

अनेक शोध से स्पष्ट है कि कैंसर के खतरे को बढ़ाने में भोजन की बड़ी भूमिका होती है। अनाज, ताजे फल और सब्जियां, लीन या पौधा आधारित प्रोटीन से कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों, डायबिटीज और कैंसर की आशंका कम होती है। प्रोसेस्ड मीट को इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च आन कैंसर ने कैंसर कारक बताया है। रेड मीट को भी सप्ताह में तीन से चार बार तक ही सीमित रखना चाहिए। मीट के बजाय मछली का सेवन कैंसर के जोखिम को कम करता है। शुगर युक्त मीठे पेय पदार्थ और अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य कैंसर का कारण बनते हैं, जिससे आंतों की कार्यप्रणाली बाधित होती है और इन्फ्लेमेशन बढ़ता है। शराब के सेवन से भी कैंसर का जोखिम रहता है।

मोटापा और कैंसर का संबंध

भोजन और कैंसर के बीच जोखिम की राह मोटापे से होकर गुजरती है। साक्ष्य बताते हैं कि ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, एंडोमेट्रियल, गैस्ट्रिक, किडनी, लीवर और पेनक्रियाटिक जैसे अनेक कैंसर मोटापे से जुड़े होते हैं। मोटापा केवल गलत खान-पान ही नहीं शारीरिक निष्क्रियता से भी होता है। हालांकि, खान-पान के जरिए अतिरिक्त बॉडी फैट या वजन को नियंत्रित किया जा सकता है। फैट टिश्यू एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ाते हैं, जिससे ब्रेस्ट और एंडोमीट्रियल जैसे कैंसर की आशंका बढ़ती है। पेट में जमा चर्बी (विसरल फैट) इंसुलिन प्रतिरोध और सूजन में वृद्धि करती है। इससे बचाव के लिए कम से कम 30 मिनट की एक्सरसाइज आवश्यक है, जिससे इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ती है और सूजन व वजन में कमी आती है। सही वजन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एक जरूरी तैयारी है।

कैंसर से बचाव के प्रभावी उपाय

  • शरीर के वजन को नियंत्रित रखें।
  • स्वस्थ आहार लें: भोजन में पर्याप्त फल और सब्जियां शामिल करें।
  • प्रतिदिन शारीरिक सक्रियता और व्यायाम करें।
  • हर तरह के तंबाकू और अल्कोहल से दूरी बनाएं।
  • डॉक्टर के परामर्श पर एचपीवी और हेपेटाइटिस बी वैक्सीन लगवाएं।
  • यूवी रेडिएशन और वायु प्रदूषण से दूर रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: कम उम्र में कैंसर का खतरा क्यों बढ़ रहा है?

A1: कम उम्र में कैंसर का खतरा बढ़ने के कई कारण हैं, जिनमें खराब जीवनशैली, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और पर्यावरणीय कारक शामिल हैं।

Q2: भोजन कैंसर के जोखिम को कैसे प्रभावित करता है?

A2: प्रोसेस्ड मीट, शुगर युक्त पेय, और अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। वहीं, फल, सब्जियां, अनाज और लीन प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार इस जोखिम को कम करने में मदद करता है।

Q3: इम्यूनोथेरेपी क्या है?

A3: इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज का एक आधुनिक तरीका है, जिसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए मजबूत किया जाता है।

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