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बिना पर्चे एंटीबायोटिक्स: 50% दवाएं खतरनाक, जानें क्यों?

बिना पर्चे एंटीबायोटिक्स बिक्री

बिना पर्चे के बिक रहीं 50% एंटीबायोटिक्स: एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट

भारत में एंटीबायोटिक्स का अनियंत्रित उपयोग एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) के खतरे को बढ़ा रहा है, जिससे सामान्य संक्रमण भी जानलेवा बन सकते हैं। जानें इस गंभीर मुद्दे के पहलू और समाधान।

बिना पर्चे एंटीबायोटिक्स बिक्री
बिना पर्चे एंटीबायोटिक्स बिक्री

एंटीबायोटिक्स की बेकाबू बिक्री और AMR का खतरा

देश में जागरूकता की कमी के कारण लोग अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुल बिकने वाली एंटीबायोटिक्स में से आधी बिना डॉक्टर के पर्चे के खरीदी जा रही हैं। यह प्रवृत्ति एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) जैसे घातक संकट को जन्म दे रही है, जो जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।

बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स लेना: एक जानलेवा गलती

एक हालिया घटना में, एक एचआईवी संक्रमित व्यक्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मेडिकल स्टोर संचालक की सलाह पर 28 दिन का दवा कोर्स ले लिया। बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई इन एंटीवायरल दवाओं के कारण उसकी जान पर बन आई और वह गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। यह एक उदाहरण है कि कैसे मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या अन्य एंटीमाइक्रोबियल दवा खरीदने और खाने से गंभीर नुकसान हो सकता है।

सरकार की चिंता और विशेषज्ञ चेतावनी

सरकार एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के डिब्बों और स्ट्रिप पर नीली पट्टी अनिवार्य करने पर विचार कर रही है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि इस प्रवृत्ति पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो उपचार के विकल्प सीमित हो जाएंगे। सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल और महंगा होता जाएगा और मौतों की संख्या बढ़ती जाएगी।

आंकड़ों की ज़ुबानी: बिना पर्चे की बिक्री का सच

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के अनुसार:

निगरानी तंत्र की कमजोरी

देश में लगभग 12 लाख लाइसेंस प्राप्त रिटेल फार्मेसी और मेडिकल स्टोर्स हैं। इनकी प्रभावी निगरानी के लिए लगभग 3,500 औषधि निरीक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन:

पर्चे पर ही बिक्री का प्रावधान, पर अनदेखी

एंटीबायोटिक की ओटीसी बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है और इसे केवल पर्चे पर ही बेचा जा सकता है। साथ ही, डीवीडीए पोर्टल पर थोक व खुदरा बिक्री व खरीद का रिकॉर्ड रखने का नियम भी है। हालांकि, इन नियमों की अनदेखी कर एंटीबायोटिक बेची जा रही हैं। औषधि विभाग को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर इसकी जांच करने का जिम्मा दिया गया है, लेकिन स्थाई औषधि निरीक्षकों और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी के कारण नियमों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

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