बिना पर्चे के बिक रहीं 50% एंटीबायोटिक्स: एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट
भारत में एंटीबायोटिक्स का अनियंत्रित उपयोग एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) के खतरे को बढ़ा रहा है, जिससे सामान्य संक्रमण भी जानलेवा बन सकते हैं। जानें इस गंभीर मुद्दे के पहलू और समाधान।

एंटीबायोटिक्स की बेकाबू बिक्री और AMR का खतरा
देश में जागरूकता की कमी के कारण लोग अपनी मर्जी से एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कुल बिकने वाली एंटीबायोटिक्स में से आधी बिना डॉक्टर के पर्चे के खरीदी जा रही हैं। यह प्रवृत्ति एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (एएमआर) जैसे घातक संकट को जन्म दे रही है, जो जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।
- एएमआर क्या है? यह वह स्थिति है जब बैक्टीरिया पर दवाओं का असर नहीं होता और साधारण संक्रमण भी जानलेवा बन जाता है।
- कानूनी प्रतिबंध: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत एंटीबायोटिक समेत सभी एंटीमाइक्रोबियल दवाओं की बिना पर्चे के बिक्री (ओटीसी) पर पूर्ण प्रतिबंध है।
- खतरनाक परिणाम: एंटीबायोटिक्स के इस अनियंत्रित दुरुपयोग से देश में हर वर्ष करीब 3 लाख लोगों की मौत हो रही है।
बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स लेना: एक जानलेवा गलती
एक हालिया घटना में, एक एचआईवी संक्रमित व्यक्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मेडिकल स्टोर संचालक की सलाह पर 28 दिन का दवा कोर्स ले लिया। बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई इन एंटीवायरल दवाओं के कारण उसकी जान पर बन आई और वह गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है। यह एक उदाहरण है कि कैसे मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक, एंटीवायरल या अन्य एंटीमाइक्रोबियल दवा खरीदने और खाने से गंभीर नुकसान हो सकता है।
सरकार की चिंता और विशेषज्ञ चेतावनी
सरकार एंटीमाइक्रोबियल दवाओं के डिब्बों और स्ट्रिप पर नीली पट्टी अनिवार्य करने पर विचार कर रही है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि इस प्रवृत्ति पर तत्काल रोक नहीं लगी, तो उपचार के विकल्प सीमित हो जाएंगे। सामान्य संक्रमण का इलाज भी मुश्किल और महंगा होता जाएगा और मौतों की संख्या बढ़ती जाएगी।
आंकड़ों की ज़ुबानी: बिना पर्चे की बिक्री का सच
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के अनुसार:
- देश में एंटीबायोटिक की कुल वार्षिक बिक्री लगभग 28,000 करोड़ रुपये है।
- इसमें से 50% हिस्सा यानी लगभग 14,000 करोड़ रुपये की बिक्री बिना डॉक्टर के पर्चे (ओटीसी) के होती है।
- एंटीबायोटिक्स को दवा की शेड्यूल एच और एच-1 श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें केवल वैध चिकित्सक के पर्चे पर ही बेचा जा सकता है।
- ओटीसी बिक्री में एमाक्सीसिलीन, एजिथ्रोमाइसीन, सिप्रोफ्लाक्सासिन जैसी कई सामान्य एंटीबायोटिक्स शामिल हैं।
- ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टर इस दुरुपयोग को और बढ़ावा देते हैं।
निगरानी तंत्र की कमजोरी
देश में लगभग 12 लाख लाइसेंस प्राप्त रिटेल फार्मेसी और मेडिकल स्टोर्स हैं। इनकी प्रभावी निगरानी के लिए लगभग 3,500 औषधि निरीक्षकों की आवश्यकता है, लेकिन:
- सीडीएससीओ में कुल 504 निरीक्षक पद स्वीकृत हैं, जिनमें से लगभग 249 पद रिक्त हैं।
- राज्य स्तर पर भी पूरे देश में लगभग 1,500 निरीक्षक कार्यरत माने जाते हैं, जो आवश्यकता से काफी कम है।
पर्चे पर ही बिक्री का प्रावधान, पर अनदेखी
एंटीबायोटिक की ओटीसी बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है और इसे केवल पर्चे पर ही बेचा जा सकता है। साथ ही, डीवीडीए पोर्टल पर थोक व खुदरा बिक्री व खरीद का रिकॉर्ड रखने का नियम भी है। हालांकि, इन नियमों की अनदेखी कर एंटीबायोटिक बेची जा रही हैं। औषधि विभाग को स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर इसकी जांच करने का जिम्मा दिया गया है, लेकिन स्थाई औषधि निरीक्षकों और पर्याप्त कर्मचारियों की कमी के कारण नियमों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- Q: एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (AMR) क्या है?
A: यह वह स्थिति है जब बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं, जिससे संक्रमण का इलाज मुश्किल या असंभव हो जाता है। - Q: भारत में कितने प्रतिशत एंटीबायोटिक्स बिना पर्चे के बिकती हैं?
A: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अनुसार, लगभग 50% एंटीबायोटिक्स बिना डॉक्टर के पर्चे के बेची जाती हैं। - Q: बिना पर्चे के एंटीबायोटिक्स बेचना गैरकानूनी क्यों है?
A: ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत एंटीबायोटिक्स को शेड्यूल एच और एच-1 श्रेणी में रखा गया है, जिन्हें केवल वैध चिकित्सक के पर्चे पर ही बेचा जा सकता है ताकि उनके दुरुपयोग को रोका जा सके। - Q: बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक्स लेने से क्या नुकसान हो सकता है?
A: इससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ सकता है, दवाएं अप्रभावी हो सकती हैं, साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, और स्थिति गंभीर या जानलेवा हो सकती है, जैसा कि लेख में दिए गए उदाहरण से स्पष्ट है।
