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बीएचयू सिलिकान चिप: छात्रों ने विकसित की पहली स्वदेशी चिप

बीएचयू सिलिकान चिप का अनावरण: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बीएचयू के इलेक्ट्रानिक्स अभियांत्रिकी विभाग के छात्रों ने सेमीकंडक्टर नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया है। उन्होंने संस्थान की पहली सफल बीएचयू सिलिकान चिप ‘टेप आउट’ को सफलतापूर्वक पूरा किया है। यह परियोजना मुख्य रूप से बीटेक द्वितीय वर्ष के छात्रों ने मात्र 5 महीने में पूरी की, जो उनकी असाधारण प्रतिभा और समर्पण को दर्शाता है।

चिप की विशेषताएं और अनुप्रयोग

छात्रों की टीम ने 64-पॉइंट फास्ट कूरियर ट्रांसफार्म (एफएफटी) हार्डवेयर एक्सीलरेटर चिप विकसित की है। यह आधुनिक सिग्नल प्रोसेसिंग प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण घटक है।

तकनीकी विवरण:

फास्ट कूरियर ट्रांसफार्म तकनीक का उपयोग डिजिटल संकेतों के विश्लेषण और प्रसंस्करण से जुड़ी कई आधुनिक प्रणालियों में किया जाता है। इसके लाभों में शामिल हैं:

परियोजना टीम और मार्गदर्शन

इस अभूतपूर्व परियोजना को सफल बनाने में कई छात्रों और मार्गदर्शकों का योगदान रहा।

मुख्य डिजाइन टीम:

इन्हें आदित्य मेहरा, अनुज पांडेय, मौलिक बोस और सेतुरत्नम केएस का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। वरिष्ठ छात्रों पुनीत मकवाना (तृतीय वर्ष) तथा चैतन्य गंबाली (चतुर्थ वर्ष) ने परियोजना को बहुमूल्य मार्गदर्शन प्रदान किया। छात्रों द्वारा संपूर्ण इंटीग्रेटेड सर्किट डिजाइन चक्र पूरा कर बीएचयू सिलिकान चिप टेप आउट तक पहुंचना वास्तव में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: बीएचयू के छात्रों ने कौन सी चिप विकसित की है?

उत्तर: बीएचयू के छात्रों ने 64-पॉइंट फास्ट कूरियर ट्रांसफार्म (FFT) हार्डवेयर एक्सीलरेटर चिप विकसित की है। यह बीएचयू सिलिकान चिप आधुनिक सिग्नल प्रोसेसिंग प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण घटक है।

प्रश्न: इस चिप के मुख्य अनुप्रयोग क्या हैं?

उत्तर: इस बीएचयू सिलिकान चिप का उपयोग मोबाइल और वायरलेस संचार को तेज और विश्वसनीय बनाने, एआई और कंप्यूटिंग अनुप्रयोगों को ऊर्जा-कुशल बनाने, तथा उन्नत रडार और संचार प्रणालियों को मजबूत करने में किया जाएगा। यह भारत की स्वदेशी सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमता को भी बढ़ावा देगी।

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