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भारत डाटा सेंटर हब: एशिया-प्रशांत में उभरता अवसर | क्षमता और नीति

भारत डाटा सेंटर हब

भारत डाटा सेंटर हब: एशिया-प्रशांत में एक उभरता अवसर

भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र का एक प्रमुख डाटा सेंटर हब बनने की अपार संभावनाएँ रखता है, बशर्ते वह बिजली और ग्रिड से संबंधित चुनौतियों का सफलतापूर्वक समाधान कर सके। वैश्विक डाटा खपत में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, लेकिन दुनिया के पांच प्रतिशत से भी कम डाटा सेंटर यहां मौजूद हैं। यह स्थिति इस क्षेत्र में भारत के लिए व्यापक विस्तार की गुंजाइश प्रदान करती है।

भारत डाटा सेंटर हब

वर्तमान स्थिति और भविष्य की क्षमता

डेलाइट दक्षिण एशिया के चीफ ग्रोथ ऑफिसर देवाशीष मिश्रा के अनुसार, भारत की डाटा सेंटर क्षमता 2025 में लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 8 से 10 गीगावाट होने की उम्मीद है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 2030 तक डाटा सेंटर में अनुमानित 800 अरब डॉलर का निवेश आने वाला है, जिससे यह उत्तरी अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा बाजार बन जाएगा। भारत इस वृद्धि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हासिल करने के लिए सबसे मजबूत दावेदारों में से एक है।

भारत के लिए लाभ के कारक

सरकारी नीतियां और प्रोत्साहन

भारत सरकार की नीतियां भी इस क्षेत्र को मजबूत समर्थन दे रही हैं। बजट में यह घोषणा की गई है कि भारत से वैश्विक स्तर पर क्लाउड सर्विस प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर नहीं देना होगा। डाटा सेंटर निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य प्रोत्साहन भी घोषित किए गए हैं, जो इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित कर रहे हैं। एआई से होने वाले विस्तार से बिजली की मांग में तेजी से वृद्धि होगी, जिसके लिए मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी।

FAQ: भारत डाटा सेंटर हब

Q1: भारत डाटा सेंटर हब बनने की राह पर क्यों है?
A1: भारत में कम निर्माण लागत, प्रतिस्पर्धी बिजली टैरिफ, विशाल एआई-कुशल कार्यबल और सरकारी नीतियों का समर्थन है, जो इसे भारत डाटा सेंटर हब बनने के लिए आदर्श बनाते हैं।

Q2: भारत की डाटा सेंटर क्षमता में कितनी वृद्धि की उम्मीद है?
A2: भारत की डाटा सेंटर क्षमता 2025 में लगभग 1.5 गीगावाट से बढ़कर 2030 तक 8 से 10 गीगावाट होने की उम्मीद है।

Q3: सरकार डाटा सेंटर निवेश को कैसे बढ़ावा दे रही है?
A3: सरकार ने भारत से वैश्विक क्लाउड सेवाएं प्रदान करने वाली विदेशी कंपनियों को 2047 तक कर छूट दी है और निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई अन्य योजनाएं भी शुरू की हैं।

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