ऑटो पीएलआइ मानदंड और ईवी स्टार्टअप्स की चिंताएँ
आम बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआइ) योजना के तहत 5,940 करोड़ रुपए का प्राविधान किया है। यह पिछले आम बजट के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा है। लेकिन इस बढ़ी हुई राशि से इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र में उन समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता, जो जड़ प्रकृति दिख रही हैं। खासतौर से इस सेक्टर के स्टार्टअप्स का कहना है कि बजट आवंटन को लेकर मौजूदा पात्रता मानदंड उनके लिए व्यावहारिक नहीं हैं।

मौजूदा पीएलआइ योजना के नियम क्या हैं?
सितंबर, 2021 में भारत में ऑटो सेक्टर के लिए लागू पीएलआइ योजना का उद्देश्य उन्नत टेक्नोलॉजी वाहनों और उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना था। मौजूदा नियमों के तहत इसका फायदा उन्हीं कंपनियों को मिलेगा जिनका वैश्विक टर्नओवर 10,000 करोड़ रुपए का हो और भारत में 3,000 करोड़ रुपए का निवेश करें।
बड़े खिलाड़ियों को लाभ
सरकार का तर्क रहा है कि देश में ईवी क्रांति को तेज करने के लिए दिग्गज ऑटो कंपनियों को इलेक्ट्रिक और उन्नत तकनीकी वाले वाहनों को पहले अपनाना होगा। इसका सकारात्मक असर भी दिखा है। कई स्थापित कंपनियों ने ईवी उत्पादन, बैटरी निर्माण और नए प्लेटफार्म में बड़े निवेश की घोषणा की है।
स्टार्टअप्स के सामने प्रमुख चुनौतियाँ
ऑटोमोबाइल सेक्टर के एक वर्ग का कहना है कि दो पहिया और तिपहिया ईवी जैसे उच्च-वृद्धि वाले सेगमेंट में ज्यादा काम स्टार्टअप कंपनियां कर रही हैं। इनके पास उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता है, लेकिन वे निर्धारित वित्तीय मानकों को पूरा नहीं कर पातीं। परिणाम स्वरूप नीति का लाभ मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों तक सीमित रह जाता है।
- ऊंची टर्नओवर और निवेश सीमा के कारण कई संभावनाओं वाली ईवी कंपनियां योजना से बाहर हैं।
- छोटे और मध्यम स्तर के ईवी स्टार्टअप्स के लिए वर्तमान ऑटो पीएलआइ मानदंड अड़चन बन रहे हैं।
- दोपहिया और तिपहिया ईवी सेगमेंट में सक्रिय स्टार्टअप्स को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा।
संभावित समाधान और सरकारी प्रतिक्रिया
सरकारी सूत्रों के मुताबिक योजना का मूल ढांचा देश में बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि वे स्टार्टअप्स की चिंताओं से अवगत हैं और योजना में संभावित संशोधनों पर विचार हो रहा है। ईवी ढांचे में स्टार्टअप की भूमिका महत्वपूर्ण होती जा रही है, और आवश्यक हुआ तो निर्धारित पात्रता शर्तों में बदलाव किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
ऑटो पीएलआइ योजना क्या है?
ऑटो पीएलआइ योजना का उद्देश्य भारत में उन्नत टेक्नोलॉजी वाहनों और उपकरणों के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देना है, जिससे देश वैश्विक विनिर्माण केंद्र बन सके।
ईवी स्टार्टअप्स को ऑटो पीएलआइ मानदंड से क्या समस्या आ रही है?
ईवी स्टार्टअप्स को ऊंची टर्नओवर और निवेश सीमा के कारण मौजूदा ऑटो पीएलआइ मानदंड व्यावहारिक नहीं लगते, जिससे वे योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
क्या सरकार इन नियमों में बदलाव करेगी?
सरकारी अधिकारी ईवी स्टार्टअप्स की चिंताओं से अवगत हैं और योजना में संभावित संशोधनों पर विचार किया जा रहा है ताकि छोटे खिलाड़ियों को भी इसमें शामिल किया जा सके।