एसेट मोनेटाइजेशन भारत जीडीपी पर ताज़ा अपडेट: पूरी जानकारी नीचे पढ़ें।
एसेट मोनेटाइजेशन: भारत की जीडीपी में 40 लाख करोड़ की वृद्धि
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसेट मोनेटाइजेशन (संपत्ति मुद्रीकरण) पहल के तहत अगले 5 से 10 सालों में भारत की जीडीपी में लगभग 40 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि होने की उम्मीद है। यह पहल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश को बढ़ावा देने और मौजूदा सार्वजनिक संपत्ति को किराए पर देकर पैसा जुटाने में अहम भूमिका निभाएगी, जिसका प्रयोग नए प्रोजेक्ट में करके आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) 2.0 के लक्ष्य
नीति आयोग ने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (एनएमपी) 2.0 का जिक्र किया है। इसका मुख्य उद्देश्य वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2029-30 तक यानी 5 साल के समय में 12 सेक्टर्स में एसेट्स के मोनेटाइजेशन के जरिए 16.72 लाख करोड़ रुपए हासिल करना है। इस लक्ष्य में 5.8 लाख करोड़ रुपए का निजी क्षेत्र का निवेश भी शामिल है।
आर्थिक विकास में भूमिका
एनएमपी 2.0 के तहत एसेट मोनेटाइजेशन से कई महत्वपूर्ण लाभ अपेक्षित हैं:
- इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में तेजी आएगी।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी।
- सार्वजनिक संपत्ति का बेहतर इस्तेमाल होगा।
- देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को मजबूती मिलेगी।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि केंद्र सरकार और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) से मिलने वाले 6.2 लाख करोड़ रुपए से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में लगभग 12.20 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त निवेश हो सकता है, जो देश की प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
FAQ
एसेट मोनेटाइजेशन क्या है?
एसेट मोनेटाइजेशन सार्वजनिक क्षेत्र की अप्रयुक्त या कम उपयोग की गई संपत्तियों को निजी क्षेत्र को एक निश्चित अवधि के लिए पट्टे पर देकर राजस्व जुटाने की एक प्रक्रिया है।
एनएमपी 2.0 का मुख्य लक्ष्य क्या है?
एनएमपी 2.0 का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 12 सेक्टर्स में एसेट मोनेटाइजेशन के जरिए 16.72 लाख करोड़ रुपए जुटाना है, जिसमें निजी निवेश भी शामिल है।
एसेट मोनेटाइजेशन से भारत की जीडीपी पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
एसेट मोनेटाइजेशन पहल से अगले 5 से 10 सालों में भारत की जीडीपी में लगभग 40 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।