एंटीबायोटिक का अनियंत्रित प्रयोग: एक बढ़ता खतरा
चंदौली जिले के ग्रामीण इलाकों में कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मत्स्य पालन में एंटीबायोटिक्स का बढ़ता और अनियंत्रित प्रयोग अब मानव स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। उत्पादन बढ़ाने और बीमारियों से बचाव के नाम पर एंटीबायोटिक्स का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है, जो एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को बढ़ावा दे रहा है।
कृषि और पशुपालन में दुरुपयोग
- खेती में: कुछ किसान फसलों को रोग से बचाने के लिए कीटनाशकों के साथ एंटीबायोटिक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
- डेयरी फार्म में: ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित डेयरी फार्म में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को बिना पशु चिकित्सक की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।
- पोल्ट्री फार्म में: चूजों को तेजी से वजन बढ़ाने और संक्रमण से बचाने के लिए दाने और पानी में दवाइयां मिलाई जा रही हैं।
- मत्स्य पालन में: मछलियों को रोग से बचाने के लिए तालाबों में एंटीबायोटिक्स का खुलेआम प्रयोग हो रहा है।
कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ विज्ञानी डॉक्टर नरेंद्र रघुवंशी ने बताया है कि किसानों और पशु पालकों को जैविक और वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यदि समय रहते एंटीबायोटिक के दुरुपयोग पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
मानव स्वास्थ्य पर दुष्परिणाम
बाबा कीनाराम चिकित्सा महाविद्यालय की उप प्राचार्य डॉक्टर नैंसी पारुल ने बताया कि एंटीबायोटिक का यह दुरुपयोग दूध, अंडा, मांस और मछली के माध्यम से मानव शरीर में पहुंच रहा है।
दवाओं का घटता असर और पर्यावरण प्रदूषण
इस अनियंत्रित प्रयोग से सामान्य संक्रमण पर दवाइयों का असर कम हो रहा है और उपचार कठिन होता जा रहा है। इसके साथ ही, मिट्टी, पानी और पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है, जिसका सीधा और बुरा असर मनुष्य के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
एंटीबायोटिक के सुरक्षित प्रयोग के लिए सावधानियां
- एंटीबायोटिक का उपयोग केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। बिना जरूरत और गलत मात्रा में दवा देने से पशुओं में दवा प्रतिरोधी क्षमता विकसित हो जाती है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।
- खेती में एंटीबायोटिक्स का प्रयोग वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए। किसानों को कीटनाशकों और जैविक विकल्पों की सही जानकारी होनी चाहिए।
- एंटीबायोटिक्स के अनावश्यक इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचता है, इसलिए किसानों को जैविक खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
यदि समय रहते एंटीबायोटिक का सही तरीके से प्रयोग नहीं किया गया, तो मनुष्य का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q: एंटीबायोटिक का अनियंत्रित प्रयोग क्या है?
A: एंटीबायोटिक का अनियंत्रित प्रयोग का अर्थ है बिना चिकित्सकीय सलाह या आवश्यकता के अधिक मात्रा में या गलत तरीके से एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना, विशेषकर कृषि और पशुपालन में।
Q: एंटीबायोटिक का अनियंत्रित प्रयोग मानव स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
A: यह दूध, अंडा, मांस और मछली के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचकर एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) को बढ़ाता है, जिससे सामान्य संक्रमणों पर दवाओं का असर कम हो जाता है और उपचार कठिन हो जाता है।
Q: एंटीबायोटिक के दुरुपयोग से बचने के लिए क्या उपाय हैं?
A: पशुओं में एंटीबायोटिक का प्रयोग केवल पशु चिकित्सक की सलाह पर करें। खेती में जैविक विकल्पों को अपनाएं और एंटीबायोटिक का इस्तेमाल वैज्ञानिक तरीके से ही करें।