एआइ तकनीक से इलाज: कानपुर में 20 मिनट में CT/MRI रिपोर्ट

एआइ तकनीक से इलाज: कानपुर में मरीजों को तुरंत रिपोर्ट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) अब स्वास्थ्य सेवा में क्रांति ला रहा है। कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशियलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट (जीएसवीएसएस पीजीआई) में एआइ आधारित सॉफ्टवेयर ने मरीजों के इलाज को न केवल आसान बनाया है, बल्कि रिपोर्ट तैयार होने में लगने वाले समय को भी काफी कम कर दिया है। यह नई पहल मरीजों को समय पर और सटीक उपचार सुनिश्चित कर रही है।

कानपुर मॉडल: 20 मिनट में CT/MRI रिपोर्ट

दिल्ली में चल रही एआइ सबमिट के बीच, कानपुर का यह मॉडल यह साबित करता है कि एआइ सिर्फ तकनीकी चर्चा का विषय नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन में समाधान प्रदान करने वाला एक उपकरण बन गया है। पहले एमआरआई और सीटी स्कैन की रिपोर्ट आने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता था, जिससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब, एआइ आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से यह रिपोर्ट सिर्फ 20 मिनट में तैयार हो जाती है, जिससे तत्काल उपचार शुरू करना संभव हो गया है।

कैसे काम करती है यह प्रणाली?

संस्थान में प्रतिदिन 600 से अधिक मरीज आते हैं, जिनमें से 25-30 मरीजों को एमआरआई और सीटी स्कैन की आवश्यकता होती है। रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण होने वाली देरी से गंभीर मरीजों के उपचार पर असर पड़ने का खतरा रहता था। एआइ आधारित सॉफ्टवेयर ने इस समस्या को काफी हद तक हल किया है।

  • तेज रिपोर्टिंग: सीटी स्कैन और एमआरआई रिपोर्ट 20 मिनट में तैयार।
  • सटीक निदान: एआइ पहले से संरक्षित विशेषज्ञ डेटा का उपयोग कर प्रारंभिक रिपोर्ट बनाता है।
  • दोस्तरीय जांच: रेडियोलॉजिस्ट अंतिम समीक्षा कर त्रुटि की संभावना को कम करते हैं।
  • मरीजों को लाभ: समय की बचत और त्वरित उपचार सुनिश्चित।

एआइ रिपोर्ट की सटीकता और उपयोग

प्रारंभिक स्तर पर 80 प्रतिशत तक रिपोर्ट सटीक पाई गई हैं, शेष मामलों में रेडियोलॉजिस्ट ने संशोधन कर डेटा अपडेट किया। यह सॉफ्टवेयर विशेष रूप से निम्नलिखित बीमारियों की रिपोर्टिंग में कारगर है:

  • ब्रेन और स्पाइनल की जटिल बीमारियां
  • ट्यूमर (कैंसर)
  • संक्रमण (इंसेफेलाइटिस)
  • सूजन संबंधी रोग (मल्टीपल स्क्लेरोसिस)
  • न्यूरो डीजेनेरेटिव रोग (पार्किंसन, अल्जाइमर)
  • स्पाइनल स्टेनोसिस या हर्नियेटेड डिस्क

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न: कानपुर में एआइ तकनीक से इलाज से मरीजों को क्या मुख्य लाभ मिल रहा है?
उत्तर: कानपुर के जीएसवीएसएस पीजीआई में एआइ तकनीक से मरीजों को सीटी स्कैन और एमआरआई की रिपोर्ट सिर्फ 20 मिनट में मिल रही है, जिससे उन्हें त्वरित और सटीक उपचार प्राप्त हो रहा है, और प्रतीक्षा समय काफी कम हो गया है।

प्रश्न: एआइ आधारित सॉफ्टवेयर कितनी सटीक रिपोर्ट तैयार करता है?
उत्तर: प्रारंभिक स्तर पर 80 प्रतिशत तक रिपोर्ट सटीक पाई गई हैं। इसके बाद रेडियोलॉजिस्ट द्वारा अंतिम समीक्षा की जाती है, जिससे त्रुटि की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

प्रश्न: क्या एआइ सॉफ्टवेयर गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का निदान कर सकता है?
उत्तर: हाँ, यह सॉफ्टवेयर ब्रेन और स्पाइनल की जटिल बीमारियों जैसे ट्यूमर, संक्रमण, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, पार्किंसन, अल्जाइमर और स्पाइनल स्टेनोसिस जैसी स्थितियों की रिपोर्टिंग में विशेष रूप से प्रभावी है।

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