करेले की नई किस्म: ‘काशी अर्पिता’ से पाएं अधिक उपज और लाभ

करेले की नई किस्म

करेले की नई किस्म ‘काशी अर्पिता’: बीमारियों से मुक्त, ज्यादा पैदावार

भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आइआइवीआर), वाराणसी के वैज्ञानिकों ने करेले की एक क्रांतिकारी नई हाइब्रिड किस्म विकसित की है, जिसका नाम ‘काशी अर्पिता’ है। यह किस्म किसानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है, क्योंकि यह चूर्णी फफूंद और वायरस जनित रोगों के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। इसके अलावा, इस पर कीट-पतंगों का प्रकोप भी कम होता है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है।

करेले की नई किस्म
करेले की नई किस्म

‘काशी अर्पिता’ की प्रमुख विशेषताएं

यह नई किस्म पारंपरिक और अन्य हाइब्रिड किस्मों की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत अधिक औसत पैदावार देती है।

उत्पादन क्षमता

  • प्रति हेक्टेयर 25 से 27 टन तक उपज।
  • किसानों को अधिक लाभ कमाने का अवसर।

फसल के गुण

  • आकर्षक हरे रंग के करेले।
  • मध्यम कटीले उभार स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
  • औसत लंबाई 15 से 18 सेमी।
  • वजन 80 से 85 ग्राम, जो बाजार की मांग के अनुरूप है।

पोषकीय और औषधीय लाभ

यह करेले की किस्म पोषकीय एवं औषधीय गुणों से भरपूर है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं।

किसानों के लिए लाभ

‘काशी अर्पिता’ किस्म को अपनाने से किसानों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं:

  • उच्च पैदावार: पारंपरिक किस्मों की तुलना में 15-20% अधिक उपज।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: चूर्णी फफूंद और वायरस जनित रोगों के प्रति प्रतिरोधी।
  • कीटनाशकों की कम आवश्यकता: कीट-पतंगों का प्रकोप कम होने से कीटनाशकों का प्रयोग लगभग न के बराबर होता है।
  • खेती की लागत में कमी: कम कीटनाशक और बेहतर उपज से लागत में बड़ी बचत।
  • बेहतर गुणवत्ता: अच्छी गुणवत्ता की फसल मिलती है।
  • आय में वृद्धि: अधिक पैदावार और कम लागत से किसानों की आय बढ़ती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: ‘काशी अर्पिता’ क्या है?

उत्तर: ‘काशी अर्पिता’ भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आइआइवीआर) द्वारा विकसित करेले की एक नई उन्नत हाइब्रिड किस्म है, जो रोग प्रतिरोधी है और उच्च पैदावार देती है।

प्रश्न: यह किस्म अन्य किस्मों से कैसे बेहतर है?

उत्तर: यह चूर्णी फफूंद और वायरस जनित रोगों के प्रति प्रतिरोधी है, कीटों का प्रकोप कम होता है, और इसकी पैदावार पारंपरिक किस्मों से 15-20% अधिक होती है।

प्रश्न: किसान इस किस्म से प्रति हेक्टेयर कितनी उपज प्राप्त कर सकते हैं?

उत्तर: किसान प्रति हेक्टेयर 25 से 27 टन तक करेले की उपज ले सकते हैं।

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