अस्पतालों में संक्रमण: हर साल हजारों नवजातों की मौत, जानिए कारण

अस्पतालों में संक्रमण

अस्पतालों में संक्रमण: एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या

भारत के अस्पतालों में स्वच्छता की बदहाल स्थिति एक भयावह सच्चाई बन गई है। कल्पना कीजिए एक ऐसे दंपति की, जिन्हें 15 साल बाद संतान प्राप्ति की आशा थी, लेकिन अस्पताल में ही नवजात की सांसें थम गईं। यह किसी कल्पना से अधिक, देश के अधिकतर सरकारी अस्पतालों की हकीकत है, जहाँ गंदगी से संक्रमण (अस्पतालों में संक्रमण) फैल रहा है और उपचार के स्थान पर मरीज और बीमार हो रहे हैं।

अस्पतालों में संक्रमण
अस्पतालों में संक्रमण

नवजातों की मौत और एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR)

नेशनल एकेडमी ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (NAMS) की 2025 टास्क फोर्स रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर साल 58 हजार से अधिक नवजात शिशु अस्पतालों में रक्त प्रवाह संक्रमण (ब्लड स्ट्रीम इन्फेक्शन) से अपनी जान गंवा देते हैं। इन मौतों का एक बड़ा कारण ऐसे बैक्टीरिया हैं जिन पर एंटीबायोटिक दवाएं अब काम नहीं करतीं, जिसे एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) कहा जाता है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि हालात नहीं सुधरे तो 2050 तक यह संख्या 20 लाख प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है।

संक्रमण फैलने के मुख्य कारण

अस्पताल, जो जीवन बचाने के लिए होते हैं, अक्सर गंदगी के कारण बीमारी का घर बन जाते हैं। अस्पतालों में संक्रमण फैलने के कुछ प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:

  • गंदे वार्ड और बदबू मारते शौचालय।
  • संक्रमित बिस्तर और उपकरणों का सही से स्टेरलाइज न होना।
  • लेबर रूम में स्वच्छता की कमी, जहाँ नवजात शिशु सबसे अधिक जोखिम में होते हैं।
  • बायोमेडिकल कचरे का लापरवाह निस्तारण, जिससे खतरनाक बैक्टीरिया पनपते हैं।
  • ऑपरेशन थिएटर तक में स्वच्छता मानकों की अनदेखी।

बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (UNICEF) की रिपोर्ट भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं की एक चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार:

  • भारत की 40% से अधिक स्वास्थ्य सुविधाओं में सुरक्षित रूप से हाथ धोने की बुनियादी व्यवस्था नहीं है।
  • लेबर रूम में केवल 19% जगहों पर ही कार्यशील शौचालय मौजूद हैं।
  • 62% संस्थानों में पानी की सुविधा तो है, लेकिन सैनिटेशन (स्वच्छता) केवल 16% और हाइजीन (व्यक्तिगत सफाई) सुविधाएं महज 35% केंद्रों में ही उपलब्ध हैं।

देश में लगभग 70,000 अस्पताल हैं, जिनमें 26,000 सरकारी और 44,000 निजी अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में प्रतिदिन दो करोड़ से अधिक लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। इतनी भारी भीड़ के बीच, यदि स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए, तो संक्रमण का फैलना तय है, जिससे अस्पतालों में संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: अस्पतालों में संक्रमण (Hospital Acquired Infections) क्या हैं?

A1: अस्पतालों में संक्रमण, जिन्हें नोसोकोमियल संक्रमण भी कहा जाता है, वे संक्रमण हैं जो मरीज को अस्पताल में भर्ती होने के 48 घंटे या उससे अधिक समय के बाद होते, या अस्पताल से छुट्टी मिलने के 30 दिनों के भीतर विकसित होते हैं। ये आमतौर पर अस्पताल के वातावरण में मौजूद बैक्टीरिया या अन्य रोगाणुओं के कारण फैलते हैं।

Q2: एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का नवजातों की मौत से क्या संबंध है?

A2: AMR तब होता है जब बैक्टीरिया, वायरस, कवक और परजीवी समय के साथ बदलते हैं और दवाओं पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देते हैं, जिससे संक्रमण का इलाज करना मुश्किल हो जाता है। अस्पतालों में स्वच्छता की कमी से पैदा होने वाले संक्रमण अक्सर ऐसे रोगाणुओं के कारण होते हैं जिन पर सामान्य एंटीबायोटिक बेअसर हो जाती हैं, जिससे नवजात शिशुओं जैसे कमजोर मरीजों का इलाज कठिन हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है।

Q3: अस्पतालों में स्वच्छता कैसे सुधारी जा सकती है?

A3: अस्पतालों में स्वच्छता सुधारने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं: कर्मचारियों के लिए नियमित हैंड हाइजीन प्रशिक्षण, उपकरणों का उचित स्टेरलाइजेशन, बायोमेडिकल कचरे का सुरक्षित निपटान, वार्ड और शौचालयों की नियमित सफाई, और लेबर रूम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सख्त स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन।

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