उत्तर प्रदेश बिजली महंगी पर ताज़ा अपडेट: पूरी जानकारी नीचे पढ़ें।

उत्तर प्रदेश में बिजली महंगी होने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों के निर्धारण संबंधी प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने स्वीकार कर लिया है। माना जा रहा है कि अप्रैल से उपभोक्ताओं को औसतन 20% तक ज्यादा बिल चुकाना पड़ सकता है।
उत्तर प्रदेश में बिजली क्यों होगी महंगी?
बिजली कंपनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) संबंधी प्रस्ताव को आयोग ने शुक्रवार को मंजूरी दे दी। कंपनियों ने एआरआर में मौजूदा दरों से दिखाए गए घाटे (राजस्व गैप) की भरपाई के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी का निर्णय आयोग पर छोड़ दिया था।
- सभी बिजली कंपनियों ने ₹1,18,741 करोड़ का एआरआर दाखिल किया था।
- बिजली खरीद के लिए ₹85,305 करोड़ और स्मार्ट प्रीपेड मीटर के संचालन के लिए ₹3837 करोड़ रखे गए हैं।
- सरकार से ₹17,100 करोड़ की सब्सिडी मिलने के बावजूद ₹12,453 करोड़ का घाटा दिखाया गया है।
- इस घाटे की भरपाई के लिए वर्तमान बिजली दर में लगभग 20% तक की बढ़ोतरी आवश्यक है।
- निजी क्षेत्र की नोएडा पावर कंपनी का एआरआर प्रस्ताव भी आयोग ने स्वीकार कर लिया है।
वितरण हानियों का अनुमान
एआरआर प्रस्ताव में पूर्व की भांति लगभग 13.07% वितरण हानियां रहने का अनुमान लगाया गया है। यह भी बिजली दरों पर असर डालने वाला एक प्रमुख कारक है।
उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
पिछले 6 वर्षों से राज्य में बिजली की दरें यथावत बनी हुई हैं। ऐसे में 20% की संभावित बढ़ोतरी आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर डालेगी। घरेलू और वाणिज्यिक दोनों तरह के उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत का बजट नए सिरे से बनाना पड़ सकता है।
चुनावी वर्ष में दरों में बढ़ोतरी का गणित
कंपनियों ने अपनी ओर से बिजली दर बढ़ाने संबंधी टैरिफ प्रस्ताव आयोग में दाखिल नहीं किया है। माना जा रहा है कि इस वर्ष पंचायत और फिर अगले वर्ष विधानसभा चुनाव को देखते हुए कंपनियों ने यह निर्णय आयोग पर छोड़ दिया है। इससे सरकार पर सीधे तौर पर दबाव कम रहेगा।
FAQ: उत्तर प्रदेश बिजली महंगी होने से जुड़े सवाल
Q1: उत्तर प्रदेश में बिजली कब से महंगी हो सकती है?
A1: संभावना है कि अप्रैल 2024 से उत्तर प्रदेश में बिजली की दरें बढ़ाई जा सकती हैं।
Q2: बिजली की दरों में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान है?
A2: कंपनियों द्वारा दिखाए गए घाटे के अनुसार, बिजली की दरों में औसतन 20% तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
Q3: बिजली कंपनियां घाटा क्यों दिखा रही हैं?
A3: बिजली कंपनियां उच्च खरीद लागत, स्मार्ट मीटर संचालन खर्च और अनुमानित वितरण हानियों के कारण राजस्व घाटा दिखा रही हैं, बावजूद सरकारी सब्सिडी के।