व्हेंस बांस तकनीक: गंगा के जलमार्ग को नया जीवन
गंगा की घटती गहराई और इसके लिए बार-बार ड्रेजिंग की जरूरत एक बड़ी चुनौती रही है। इस समस्या के समाधान के लिए आईआईटी रुड़की के विज्ञानियों ने एक अनोखी और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक विकसित की है। इसे ‘व्हेंस बांस तकनीक’ नाम दिया गया है, जो गंगा को बिना खुदाई और भारी मशीनों के उपयोग के अपनी प्राकृतिक गहराई बनाए रखने में मदद करेगी।

क्या है व्हेंस बांस तकनीक?
यह तकनीक विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में पैदा होने वाले व्हेंस बांस का उपयोग करती है। इसमें गंगा के उथले हिस्सों में एक विशेष डिज़ाइन के अनुसार बांस की बल्लियों को ‘वी’ आकार में गाड़ा जाता है।
- बांस की बल्लियों को नदी के उथले हिस्सों में ‘वी’ आकार में लगाया जाता है।
- इन बांसों के बीच एक विशेष प्रकार की जाली (मैट) लगाई जाती है।
- यह जाली बहाव के साथ आने वाली गाद को एक जगह रोक लेती है।
- गाद जमने से गंगा का पानी किनारों की बजाय मध्य धारा की ओर बहने लगता है।
- इससे गंगा की मुख्य धारा धीरे-धीरे प्राकृतिक रूप से गहरी होने लगती है।
गाजीपुर में पहला प्रयोग
व्हेंस बांस तकनीक का पहला प्रयोग गाजीपुर में शमशान घाट के पास किया गया है, जहाँ गंगा का जलस्तर काफी कम हो गया था। आईआईटी रुड़की के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर जेड अहमद के नेतृत्व में, लगभग 500 मीटर क्षेत्र में व्हेंस बांस की जाली लगाई गई है। मानसून से पहले इसे स्थापित किया गया है ताकि बरसात के दौरान नदी की धारा स्वयं गहराई बना सके। यदि परिणाम सकारात्मक रहे, तो झारखंड की साहिबगंज से लेकर वाराणसी, गाजीपुर, बक्सर, पटना, मुंगेर, भागलपुर तक गंगा के 17 चिन्हित स्थानों पर इसे लागू किया जाएगा।
ड्रेजिंग से बेहतर और टिकाऊ समाधान
प्रोफेसर जेड अहमद ने बताया कि पारंपरिक ड्रेजिंग (मशीनों से नदी की खुदाई) एक महंगी प्रक्रिया है जिसे बार-बार दोहराना पड़ता है। यह जलीय जीवों और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को भी नुकसान पहुंचाती है। इसके विपरीत, व्हेंस बांस तकनीक कई मायनों में बेहतर है:
- इसकी लागत बेहद कम है और यह स्थाई रूप से गहराई बनाए रखने में मददगार है।
- यह पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल है और जलीय जीवन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
- गंगा के प्राकृतिक प्रवाह और जैव विविधता की रक्षा होती है।
- यह कटान को रोकने में भी सहायक है।
लाभ और प्रभाव
इस नई तकनीक से जलयान का परिचालन सुगम होगा, जिससे मालवाहक जलयान, यात्री जहाज और आपात सेवाओं की आवाजाही लगातार तथा सुरक्षित बनी रहेगी। यह तकनीक वैज्ञानिक और प्राकृतिक है, जिससे नदी के स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होती और गंगा स्वयं अपनी गहराई तथा प्रवाह को संतुलित करती है।
अकसर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
व्हेंस बांस तकनीक क्या है?
व्हेंस बांस तकनीक आईआईटी रुड़की द्वारा विकसित एक अभिनव विधि है। इसमें गंगा के उथले हिस्सों में विशेष रूप से डिजाइन किए गए बांस के ढांचे और जालियों का उपयोग करके नदी को स्वयं अपनी प्राकृतिक गहराई बनाए रखने में मदद की जाती है।
यह तकनीक ड्रेजिंग से कैसे बेहतर है?
यह तकनीक ड्रेजिंग की तुलना में बहुत सस्ती, पर्यावरण के अनुकूल और स्थायी है। यह जलीय जीवन को नुकसान नहीं पहुंचाती और नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखती है, जबकि ड्रेजिंग महंगी और पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है।
इस तकनीक का पहला प्रयोग कहाँ किया गया है?
व्हेंस बांस तकनीक का पहला सफल प्रयोग गाजीपुर में शमशान घाट के पास किया गया है, जहाँ गंगा की गहराई काफी कम हो गई थी।