उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय बनेंगे ज्ञान के केंद्र – नई पहल

उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय बनेंगे ज्ञान के केंद्र - नई पहल

उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय पर ताज़ा अपडेट: पूरी जानकारी नीचे पढ़ें।

उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय बनेंगे ज्ञान के केंद्र - नई पहल
उत्तर प्रदेश सार्वजनिक पुस्तकालय

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक पुस्तकालयों का कायाकल्प: ज्ञान केंद्र की ओर

उत्तर प्रदेश के सार्वजनिक पुस्तकालयों को अब केवल किताबों का संग्रह स्थल नहीं बल्कि समाज के लिए सक्रिय ‘ज्ञान केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस नई पहल के तहत डिजिटल सुविधाओं, पठन संस्कृति के प्रोत्साहन और सामुदायिक सहभागिता पर विशेष जोर दिया जाएगा।

ज्ञान केंद्र के रूप में विकास

अपर मुख्य सचिव (बेसिक व माध्यमिक शिक्षा), पार्थ सारथी सेन शर्मा ने हाल ही में प्रयागराज स्थित केंद्रीय राज्य पुस्तकालय और प्रदेश के सभी जिला पुस्तकालयों के अध्यक्षों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में पुस्तकालयों को आधुनिक ज्ञान केंद्रों में बदलने के लिए एक विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया गया।

महत्वपूर्ण निर्देश और पहल

नवाचार और सर्वोत्तम अभ्यास

बैठक में देवरिया और संत कबीर नगर के पुस्तकालयों द्वारा प्रस्तुत नवाचारी प्रयोगों को अत्यधिक सराहा गया। अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इन सफल मॉडलों को प्रदेश के अन्य सभी पुस्तकालयों में तत्काल लागू किया जाए।

डिजिटल परिवर्तन

  • राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना।
  • डिजिटल सामग्री की उपलब्धता बढ़ाना।
  • सोशल मीडिया के माध्यम से पुस्तकालयों का प्रचार-प्रसार करना।
  • पुस्तकों के जारी करने और वापसी की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना।

यह भी तय किया गया कि अगले दो-तीन महीनों में सभी पुस्तकालयों में कंप्यूटरीकृत बुक इश्यू सिस्टम लागू किया जाएगा।

सामुदायिक जुड़ाव और कार्यक्रम

पुस्तकालयों को समाज के विभिन्न वर्गों से जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं:

  • शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों को पुस्तकालयों से जोड़ना।
  • पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पठन कार्यक्रम और चर्चा सत्र आयोजित करना।
  • समाज की भागीदारी से जन-जागरूकता अभियान चलाना।
  • पुस्तकालयों में नियमित ‘लेखक-संवाद’ कार्यक्रम आयोजित करना।

प्रगति के प्रमुख सूचक

पुस्तकालयों की लोकप्रियता और प्रभावशीलता मापने के लिए दो प्रमुख की पॉइंट इंडिकेटर (KPI) निर्धारित किए गए हैं:

  • सदस्य संख्या।
  • प्रति माह जारी पुस्तकों की संख्या।

नई पुस्तकें और आर्थिक सहयोग

अगले दो महीनों में प्रत्येक जिला पुस्तकालय को लगभग 1200 नई पुस्तकें डाक विभाग के माध्यम से भेजी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) और सामाजिक संस्थाओं के आर्थिक सहयोग से पुस्तकालयों का सामाजिक जुड़ाव और अधिक बढ़ाया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

उत्तर प्रदेश के पुस्तकालयों में क्या बदलाव हो रहे हैं?

उत्तर प्रदेश के पुस्तकालयों को अब केवल किताबों के भंडार के बजाय सक्रिय ‘ज्ञान केंद्र’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें डिजिटल सुविधाएँ और सामुदायिक भागीदारी शामिल होगी।

‘ज्ञान केंद्र’ से क्या तात्पर्य है?

‘ज्ञान केंद्र’ का अर्थ है एक ऐसा स्थान जहाँ न केवल किताबें उपलब्ध हों, बल्कि डिजिटल संसाधन, पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम और सामाजिक जुड़ाव के अवसर भी हों।

पुस्तकालयों में कौन सी डिजिटल सुविधाएँ होंगी?

पुस्तकालयों में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय, डिजिटल सामग्री की उपलब्धता, इंटरनेट मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार और पुस्तकों को ऑनलाइन जारी व वापसी करने की कंप्यूटरीकृत प्रणाली जैसी डिजिटल सुविधाएँ होंगी।

पुस्तकालयों में कौन से नए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे?

पुस्तकालयों में विद्यार्थियों, पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष पठन कार्यक्रम, चर्चा सत्र, जन-जागरूकता अभियान और नियमित ‘लेखक-संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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